
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। खजुराहो वह पवित्र स्थान है जहां पत्थरों में भी प्राण बसते हैं। यहां स्थित कंदरिया महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, वामन मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और पार्वती मंदिर जैसे भव्य देवालय हमारी सांस्कृतिक समृद्धि के प्रतीक हैं। विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में शुक्रवार से शुरू हुए सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य समारोह को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया।
मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदि संस्कृति को सनातन संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया है। मध्यप्रदेश सरकार विविध कलाओं के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से राज्य के बजट में संस्कृति विभाग के लिए राशि में वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने समारोह में पहुंचे देश-विदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों और नृत्य शैलियों के प्रतिनिधियों का स्वागत भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खजुराहो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण धरोहर है। इस वर्ष का 52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह भगवान नटराज को समर्पित है। उन्होंने संस्कृति विभाग को इस आयोजन के लिए बधाई दी। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को देव नटेश भगवान शिव से जोड़ने का अनूठा प्रयास है। उन्होंने कहा कि जो भी कला साधक मध्यप्रदेश आते हैं, वे दोबारा यहां आने की इच्छा रखते हैं।
शुभारंभ अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास राज्य मंत्री श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस मौके पर चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें ‘नटराज — भगवान शिव के नृत्य मुद्रा के करण’, खजुराहो और नृत्य समारोह पर आधारित कॉफी टेबल बुक, ‘बुंदेली — इतिहास, संस्कृति और गौरव’ तथा ‘बुन्देलखण्ड-मध्यप्रदेश की अमूल्य विरासत’ शामिल हैं। यह सात दिवसीय प्रतिष्ठित समारोह संस्कृति विभाग और उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें पुरातत्व विभाग दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर का सहयोग है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला, संचालक संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव, कलेक्टर छतरपुर श्री पार्थ जायसवाल और अकादमी के निदेशक श्री प्रकाश सिंह ठाकुर भी उपस्थित रहे।
पहले दिन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सुश्री मैत्रेयी पहाड़ी (दिल्ली) ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘प्रतिष्ठा: शाश्वत तत्वों का आह्वान’ नृत्यनाटिका प्रस्तुत की। यह प्रस्तुति पंचतत्व — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — को समर्पित थी। मृदुल भाव, सुंदर गतियों और अभिव्यक्ति के माध्यम से नर्तकों ने संतुलन, ऊर्जा और सामंजस्य का संदेश दिया। प्रस्तुति आगे बढ़ते हुए भगवान कृष्ण की दिव्य उपस्थिति तक पहुंची, जो धर्म, प्रेम और करुणा के शाश्वत प्रतीक हैं।
कथक के बाद चेन्नई की सुश्री अनुराधा वेंकटरमन ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। उन्होंने मंगलाचरण से शुरुआत करते हुए स्वप्न में भगवान शिव के भव्य प्रवेश का चित्रण किया। यह रचना राग हंसध्वनि और आदि ताल में संयोजित थी। नायिका अपने स्वप्न में शिव को विभिन्न रूपों में देखती है। प्रस्तुति के पद गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं से लिए गए थे।
इसके बाद भुवनेश्वर की सुश्री शुभदा वरडाकर ने ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ‘अभेदम्’ शीर्षक पर आधारित थी। यह अद्वैत वेदांत दर्शन से प्रेरित थी और आत्मा व परमात्मा की एकता का संदेश देती है। प्रस्तुति में “चिदानन्दरूपः शिवोऽहम्” के भाव को साकार किया गया।
समारोह के दूसरे दिन 21 फरवरी 2026 को शाम 6:30 बजे से दिल्ली के श्री विश्वदीप कथक प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद झारखंड के श्री प्रभात मेहतो छाऊ नृत्य और कजाकिस्तान की सुश्री अक्मारल काइना रोवा भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी।
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