NO Kings Protest USA: ट्रंप की आव्रजन और विदेश नीति के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। ‘नो किंग्स’ अभियान के तहत 3,000 से ज्यादा कार्यक्रम हुए और करीब 80 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। बड़े शहरों में रैली और मार्च निकाले गए।
अमेरिका में इन दिनों राजनीति का माहौल काफी गरम है। राष्ट्रपति Donald Trump की आव्रजन और विदेश नीति को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी गुस्से का नतीजा है कि देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। इन प्रदर्शनों को ‘नो किंग्स’ अभियान के नाम से आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने साफ संदेश दिया कि अमेरिका में लोकतंत्र है और यहां किसी एक व्यक्ति की मनमानी नहीं चल सकती।
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3 हजार से ज्यादा कार्यक्रम, लाखों लोग शामिल
आयोजकों के मुताबिक यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा था। इस अभियान के तहत पूरे अमेरिका में 3,000 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। सबसे बड़ी रैली मिनेसोटा के सेंट पॉल स्थित Minnesota State Capitol में हुई, जहां अनुमान के मुताबिक करीब 2 लाख से ज्यादा लोग जुटे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पूरे अमेरिका में आयोजित ‘नो किंग्स डे’ प्रदर्शनों में लगभग 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इतने बड़े स्तर पर लोगों का सड़कों पर उतरना यह दिखाता है कि कई अमेरिकी नागरिक मौजूदा प्रशासन की नीतियों से असंतुष्ट हैं।
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सड़कों पर मार्च, पोस्टर और नारे
विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शहरों की मुख्य सड़कों पर मार्च निकाला, नारे लगाए और प्रशासन की आलोचना करने वाले पोस्टर और बैनर लहराए। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध दो मुद्दों पर केंद्रित था-
आव्रजन को लेकर सख्त सरकारी कार्रवाई
ईरान से जुड़े विवाद में प्रशासन की भूमिका
कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़क किनारे लंबी कतार बनाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया, जबकि कुछ जगहों पर लोग सार्वजनिक चौक और सरकारी इमारतों के सामने इकट्ठा होकर नारे लगाते दिखाई दिए।
अमेरिका के कई प्रमुख शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। इनमें New York City, Washington, D.C., Los Angeles, Chicago और San Francisco जैसे शहर शामिल हैं। इन शहरों में प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाले और सरकारी इमारतों के बाहर रैलियां कीं। कई जगहों पर लोगों ने तख्तियां लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए।
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सेंट पॉल की रैली में कई बड़ी हस्तियां शामिल
सेंट पॉल में हुई मुख्य रैली में कई जाने-माने राजनेता और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां भी शामिल हुईं। मिनेसोटा के गवर्नर Tim Walz ने लोगों को संबोधित किया और मशहूर सिंगर Bruce Springsteen का मंच पर स्वागत किया। इस मौके पर स्प्रिंगस्टीन ने एक गीत भी प्रस्तुत किया। इसके अलावा इस रैली में Bernie Sanders, Joan Baez, Maggie Rogers और Jane Fonda जैसी कई जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हुईं।
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प्रतीकात्मक विरोध भी देखने को मिला
कई शहरों में विरोध प्रदर्शन सिर्फ भाषण या नारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतीकात्मक गतिविधियां भी देखने को मिलीं। उदाहरण के तौर पर Houston में प्रदर्शनकारी अमेरिकी संविधान की एक विशाल प्रतिकृति लेकर मार्च करते नजर आए। आयोजकों के मुताबिक यह लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक था। वहीं Los Angeles में सिटी हॉल के बाहर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और वहां से शहर की सड़कों पर मार्च निकाला।
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नेताओं ने क्या कहा
कनेक्टिकट से प्रतिनिधि John B. Larson ने कहा, “आज हम यहां यह कहने के लिए इकट्ठा हुए हैं कि अमेरिका में कोई राजा नहीं होता। अगर आम लोग एकजुट रहें और अपनी आवाज उठाते रहें, तो हमें कोई हरा नहीं सकता।” सीनेटर Kirsten Gillibrand ने भी प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका में किसी राजा के सामने सिर नहीं झुकाया जाता।
उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जैसे महंगाई कम करना, स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बनाना और हर परिवार को आगे बढ़ने का मौका देना। वहीं सीनेटर Bernie Sanders ने कहा, “2026 में हमारा संदेश साफ है, अब कोई राजा नहीं। हम इस देश को तानाशाही की ओर नहीं जाने देंगे। अमेरिका में जनता ही शासन करेगी।”
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क्यों अहम माना जा रहा है यह विरोध
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इतने बड़े स्तर पर हुआ यह विरोध प्रदर्शन अमेरिका की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का संकेत है। इससे यह भी साफ होता है कि देश के एक बड़े वर्ग में सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में यह विरोध किस दिशा में जाता है, और इसका अमेरिकी राजनीति पर क्या असर पड़ता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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