7 अक्टूबर 2001 से 9 जून 2024 तक...ये हैं नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक यात्रा की 15 सबसे खास तारीख

Published : Sep 17, 2026, 09:13 AM IST

Narendra Modi Political Journey: 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है। उनका राजनीतिक सफर संगठन की जिम्मेदारियों से शुरू होकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक पहुंचा। जानते हैं मोदी के राजनीतिक सफर की 15 सबसे खास तारीखें...

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1972: RSS में प्रचारक की भूमिका

नरेंद्र मोदी के राजनीतिक-सामाजिक जीवन में RSS का दौर एक अहम शुरुआती पड़ाव रहा। अहमदाबाद आने के बाद उन्होंने RSS से जुड़कर काम शुरू किया और 1972 में प्रचारक की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में संगठन के लिए काम करना, लोगों से संपर्क और रोजमर्रा की कड़ी दिनचर्या उनकी जिंदगी का हिस्सा बनी। यही संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति में भी दिखाई दिया।

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जून 1975: इमरजेंसी का दौर

देश में 25 जून 1975 को इमरजेंसी लागू हुई। मोदी उस समय RSS से जुड़े कार्यकर्ता थे। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान भूमिगत रहकर संगठन के काम में हिस्सा लिया। यह दौर उनके संगठनात्मक अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।

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1987: BJP की राजनीति में बड़ा कदम

1987 में नरेंद्र मोदी ने BJP के गुजरात संगठन में काम शुरू किया। उन्हें गुजरात BJP का महासचिव बनाया गया और इसी दौरान अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में पार्टी के संगठनात्मक काम में उनकी भूमिका रही। यह पड़ाव इसलिए अहम था क्योंकि RSS की संगठनात्मक भूमिका से आगे बढ़कर वह सीधे पार्टी की चुनावी राजनीति में दिखाई देने लगे।

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1990: सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा

1990 में लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा BJP की राजनीति का बड़ा राष्ट्रीय घटनाक्रम बनी। नरेंद्र मोदी ने गुजरात में इस यात्रा के संगठनात्मक प्रबंधन में भूमिका निभाई। इस दौर ने उन्हें गुजरात से बाहर राष्ट्रीय पार्टी संगठन के काम में भी ज्यादा पहचान दिलाई।

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1991-92: एकता यात्रा

मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कन्याकुमारी से श्रीनगर तक निकली एकता यात्रा में भी नरेंद्र मोदी की संगठनात्मक भूमिका बताई जाती है। इस यात्रा की तैयारी और प्रबंधन से जुड़े काम ने उन्हें BJP के राष्ट्रीय स्तर के संगठन में आगे बढ़ने का अनुभव दिया। यात्रा का समापन 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम से हुआ था।

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1995: BJP की गुजरात में बड़ी जीत

1995 का गुजरात विधानसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के संगठनात्मक करियर का अहम पड़ाव रहा। BJP ने गुजरात विधानसभा में 121 सीटें जीतीं। इसी दौर में मोदी को BJP का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और उन्हें हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की जिम्मेदारी दी गई। उनका काम अब सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं रहा था।

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1998: राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी

1998 में नरेंद्र मोदी को BJP के राष्ट्रीय महासचिव यानी संगठन की जिम्मेदारी मिली। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अलग-अलग राज्यों में पार्टी संगठन के काम को संभाला। इसी समय BJP ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की और केंद्र में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ी।

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7 अक्टूबर 2001: गुजरात के मुख्यमंत्री बने

यह नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में शामिल है। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इससे पहले वह मुख्य रूप से संगठन की राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन अब उनके सामने सीधे सरकार चलाने की जिम्मेदारी थी। उनका गुजरात का मुख्यमंत्री कार्यकाल मई 2014 तक चला।

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दिसंबर 2002: पहली विधानसभा जीत के बाद सत्ता में वापसी

मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2002 में पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव का सामना किया। दिसंबर 2002 के चुनाव में BJP ने सरकार बनाई और मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखा। इसके बाद वह 2007 और 2012 में भी गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए।

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23 दिसंबर 2007: दूसरी बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद पर वापसी

गुजरात विधानसभा चुनाव 2007 में BJP की जीत के बाद नरेंद्र मोदी 23 दिसंबर 2007 को मुख्यमंत्री बने। यह उनका तीसरा मुख्यमंत्री कार्यकाल था। गुजरात की सत्ता में लगातार बने रहने से उनका राजनीतिक प्रोफाइल राज्य से आगे राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आने लगा।

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20 दिसंबर 2012: गुजरात में चौथा कार्यकाल

2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के बाद नरेंद्र मोदी 20 दिसंबर 2012 को चौथी बार मुख्यमंत्री बने। वह मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। यही वह दौर था जब राष्ट्रीय राजनीति में उनके नाम को लेकर चर्चा और तेज हुई और अगले लोकसभा चुनाव की राजनीति में उनका नाम प्रमुखता से सामने आने लगा।

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13 सितंबर 2013: BJP ने PM उम्मीदवार घोषित किया

13 सितंबर 2013 नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़ा मोड़ था। BJP ने उन्हें 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। इसके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका राष्ट्रीय चुनाव की केंद्रीय राजनीति से सीधे जुड़ गई। इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव उनकी राजनीतिक यात्रा का अगला बड़ा पड़ाव बना।

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26 मई 2014: पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ

लोकसभा चुनाव 2014 में NDA को बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचना उनकी राजनीतिक यात्रा का एक बड़ा बदलाव था।

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30 मई 2019: दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी 30 मई 2019 को दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस चुनाव के बाद उनकी केंद्र सरकार का दूसरा लगातार कार्यकाल शुरू हुआ।

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9 जून 2024: तीसरी बार प्रधानमंत्री बने

9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बनी सरकार के साथ मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इसके साथ उनकी राजनीतिक यात्रा का एक और बड़ा चरण शुरू हुआ।

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