Maratha Reservation: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को मराठा समुदाय की मांगें पूरी करने के लिए 90 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
मुंबई (महाराष्ट्र): मराठा आरक्षण की मांग कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को मराठा समुदाय की मुख्य मांगों पर एक्शन लेने के लिए 90 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। जरांगे ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और अगर सरकार ने उनके साथ धोखा किया, तो यह प्रदर्शन और भी तेज होगा।
सरकार पर किया एक आखिरी बार भरोसा
- जरांगे ने कहा, "हम सरकार को एक आखिरी मौका दे रहे हैं। हम उन्हें 90 दिन का समय देंगे, लेकिन जब तक हमें पूरी कामयाबी नहीं मिल जाती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"
- प्रशासन पर 'एक आखिरी बार' भरोसा जताते हुए जरांगे ने कहा कि सतारा, कोल्हापुर, औंध और पुणे गजेटियर से जुड़े सरकारी प्रस्ताव (GR) के लिए सरकार को 90 दिन का समय दिया जाएगा।
- वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बताया कि सतारा, कोल्हापुर और औंध रियासतों से जुड़ी रिपोर्ट को फाइनल होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। उनके मुताबिक, यह रिपोर्ट करीब 1,600 पन्नों की है।
जरांगे ने सरकार से की एक अपील
- जरांगे ने सरकार से मराठा समुदाय की मांगों पर ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने EWS और SEBC कैटेगरी से जुड़े मुद्दों को सुलझाने, SARTHI से जुड़े मामलों पर ध्यान देने और आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को पूरा सम्मान देने की मांग की।
- जरांगे ने आरोप लगाया कि आंदोलन में बलिदान देने वाले परिवारों को MIDC के एक कैंप में बुलाया गया था, लेकिन वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।
- सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए इस कार्यकर्ता ने कहा कि प्रशासन को कुनबी रिकॉर्ड खोजने का दायरा बढ़ाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार सिर्फ कोरे आश्वासन न दे, बल्कि इन रिकॉर्ड्स को खोजने में आम जनता को भी शामिल करे।
- सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कुनबी रिकॉर्ड्स में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, जरांगे ने इस मामले में सरकार से लिखित आश्वासन और एक तय समय-सीमा की मांग की है।
- इस बैठक में जाति सत्यापन समितियों के लिए कैंप लगाने और आम जनता के लिए हैदराबाद गजेटियर से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई।


