नाम बदलना, बुर्खा ट्रेनिंग और मलेशिया कनेक्शन: TCS नासिक केस में निदा खान के कोर्ट में नए कारनामे

Published : Apr 28, 2026, 10:07 AM IST

नासिक TCS केस में बड़ा रहस्य: SIT को मिले नए सबूतों में निदा खान पर धर्म परिवर्तन, नाम बदलने, बुर्का सिखाने और मलेशिया नौकरी के लालच का आरोप। जांच मालेगांव-मलेशिया तक फैली, आरोपी फरार, केस में सस्पेंस और बढ़ा।

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TCS Nashik Case Court Hearing: नासिक स्थित TCS कार्यालय से जुड़े कथित धर्मांतरण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले ने सोमवार को अदालत में नया मोड़ ले लिया। विशेष सरकारी वकील अजय मिश्रा ने नासिक कोर्ट को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) को ऐसे नए साक्ष्य मिले हैं, जिनसे मामला केवल नासिक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका नेटवर्क मालेगांव और मलेशिया तक फैला हुआ प्रतीत होता है। यह दावा सामने आने के बाद केस की गंभीरता और बढ़ गई है, क्योंकि जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की संभावना को भी खंगाल रही हैं।

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बुर्का, नाम बदलने की कोशिश और धार्मिक प्रशिक्षण के आरोप

सरकारी पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी निदा खान ने शिकायतकर्ताओं में से एक को कथित तौर पर धार्मिक रीति-रिवाज सिखाकर इस्लाम अपनाने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की। आरोपों के अनुसार, शिकायतकर्ता को बुर्का दिया गया, धार्मिक किताबें दी गईं और उसके फोन में धार्मिक शिक्षा से जुड़े ऐप्स इंस्टॉल किए गए। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि शिकायतकर्ता को नमाज पढ़ने, हिजाब और बुर्का पहनने की प्रक्रिया सिखाई गई और उसका नाम बदलकर “हानिया” रखने की योजना पर भी विचार हुआ।

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मलेशिया तक फैला नेटवर्क या नौकरी का लालच?

सरकारी वकील के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पक्ष ने शिकायतकर्ता को मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच दिया था। इसके लिए एक व्यक्ति इमरान का नाम सामने आया है, जिसके जरिए कथित तौर पर विदेश भेजने की योजना बनाई जा रही थी। SIT को शक है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है, जिसकी जांच अभी जारी है।

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फरार आरोपी और मोबाइल फोन को लेकर विवाद

अदालत को बताया गया कि मुख्य आरोपी निदा खान फिलहाल फरार है। सरकारी पक्ष ने उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके मोबाइल फोन की जब्ती को जरूरी बताया, ताकि संभावित अन्य पीड़ितों या संपर्कों का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी आशंका जताई गई कि यदि उसे अग्रिम जमानत दी गई, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है।

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बचाव पक्ष का पलटवार और कानूनी सवाल

वहीं बचाव पक्ष के वकील राहुल कसलीवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कोई स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि लगाए गए आरोप मुख्य रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तक सीमित हैं और वास्तविक धर्मांतरण का कोई प्रमाण नहीं है। इसके अलावा उन्होंने एक ही मामले में नौ अलग-अलग FIR दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठाया और इसे कानूनी रूप से अनुचित बताया।

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अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब यह मामला 2 मई को फिर से अदालत में सुना जाएगा, जहां जांच एजेंसियां और बचाव पक्ष दोनों अपने-अपने तर्क और सबूत पेश करेंगे। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह केस न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील होता जा रहा है।

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