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TCS Nashik Case: IT कंपनी के ‘ऑर्गनाईज्ड गैंग’ का खुलासा, महिलाओं ने खोली ऑफिस की खौफनाक सच्चाई
TCS नाशिक ऑफिस में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न केस में बड़ा खुलासा-9 FIR दर्ज, SIT जांच तेज़। महिला कर्मचारियों ने ‘संगठित गिरोह’ पर मानसिक शोषण, दबाव और धार्मिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। कई आरोपी गिरफ्तार, HR की भूमिका पर भी सवाल।

TCS Religious Conversion Case: महाराष्ट्र के नाशिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ऑफिस में कथित रूप से सामने आए यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के मामलों ने बड़ा रूप ले लिया है। शुरुआती शिकायत एक राजनीतिक कार्यकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक महिला कर्मचारी पर धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने का दबाव बनाया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जो आगे चलकर कई शिकायतों और FIRs तक पहुंच गई। सामने आए आरोपों ने एक बड़े कॉर्पोरेट ढांचे के भीतर संभावित ‘पैरेलल सिस्टम’ की ओर इशारा किया है। पुलिस जांच के अनुसार, कुछ कर्मचारी संगठित तरीके से महिलाओं को निशाना बना रहे थे। यह मामला केवल कार्यस्थल उत्पीड़न तक सीमित नहीं, बल्कि कथित तौर पर धर्मांतरण के प्रयासों तक जुड़ा बताया जा रहा है।
‘संगठित गिरोह’ का दावा-टीम लीडर ही बने केंद्र
पुलिस जांच में यह दावा सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ पदों पर तैनात कर्मचारी कथित रूप से मिलकर काम कर रहे थे। आरोप है कि इस समूह ने महिला सहकर्मियों को निशाना बनाया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गतिविधियां व्यक्तिगत नहीं बल्कि एक पैटर्न के रूप में सामने आई हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। कुल नौ FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सात पुरुष आरोपी हिरासत में हैं, जबकि एचआर हेड निदा ख्रान अभी भी फरार बताई जा रही है।
HR की भूमिका पर सवाल-‘शिकायत दबाने’ का आरोप
इस मामले में HR मैनेजर निदा खान की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया और कुछ मामलों में पीड़ितों को धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए प्रभावित किया। इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।हालांकि, ये सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
जांच की शुरुआत कैसे हुई? एक शिकायत से खुला बड़ा मामला
पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें एक महिला कर्मचारी पर धार्मिक प्रभाव डालने की बात कही गई थी। इसके बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की, जिसमें कई और पीड़ित सामने आए। जांच का दायरा अब SIT के तहत बढ़ाया गया है और ATS व अन्य एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है। जो हर एंगल से जांच कर रहा है। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अन्य केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा सकती है।
कंपनी की प्रतिक्रिया: ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का दावा
TCS ने सभी आरोपियों को निलंबित कर दिया है और COO की निगरानी में आंतरिक जांच शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि वह उत्पीड़न के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतती और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
जांच जारी: क्या सामने आएगा और बड़ा सच?
पुलिस का कहना है कि शुरुआती शिकायत के बाद कई और पीड़ित सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क मौजूद है। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट कई अहम खुलासे कर सकती है-जो इस केस की दिशा तय करेंगे।
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