
Sadhguru Kailash Yatra Flood: चीन के तिब्बत क्षेत्र स्थित ग्यिरोंग (Gyirong) में आई भीषण और अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा से लौट रहा श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था इस कुदरती तबाही की ज़द में आ गया है। जिस समय बाढ़ का भयानक सैलाब आया, उस समय श्रद्धालु सीमा पर स्थित इमिग्रेशन दफ़्तर में कागज़ी कार्रवाई पूरी कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी और मलबे का बहाव इतना तेज़ था कि देखते ही देखते इमिग्रेशन ऑफिस की इमारत और ग्यिरोंग कस्बे का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया।
Sadhguru's Appeal to the Authorities & Administration. pic.twitter.com/wKu89gtdnU
— Sadhguru (@SadhguruJV) August 27, 2026
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जगगी वासुदेव ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए बताया कि इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद श्रद्धालुओं का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ के बाद से वहां से कोई आधिकारिक जानकारी या संदेश नहीं मिला है। कैलाश यात्रा पर निकले कुल 21 समूहों के डेटा के अनुसार, 495 श्रद्धालु सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग अभी तिब्बत में, 148 नेपाल में, 77 इमिग्रेशन सेंटर में और 3 वॉलंटियर्स नेपाल के तिमुरे इलाके में मौजूद थे। इस बीच इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद 80 सदस्यों का संपर्क पूरी तरह कट जाने से उनके परिजनों की चिंता चरम पर पहुंच गई है।
इस संकट की घड़ी में सद्गुरु खुद जमीनी हालात पर नज़र रखने के लिए तिब्बत के सागा (Saga) इलाके में मौजूद हैं। 27 अगस्त 2026 को उन्होंने चीनी अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को एक भावुक पत्र लिखकर खुद ग्यिरोंग जाने की अनुमति मांगी है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि वे और उनके वॉलंटियर्स राहत और बचाव कार्यों के नियमों का पूरा सम्मान करते हुए केवल मदद के इरादे से वहां जाना चाहते हैं, ताकि मलबे के बीच से अपनों की खोज और परिवारों को जानकारी देने में मदद की जा सके।
UPDATE: The wall of water that ripped out of Tibet into Rasuwa is now one of Nepal’s deadliest Himalayan floods in years.
Confirmed dead: 165+ in Nepal (toll still rising; later local reports higher). 3 confirmed in Tibet.
Missing: ~826 in Nepal, including 579 travellers (466… https://t.co/nLIWtKiRta pic.twitter.com/l2e0aytQxd— Predictivemoney (@Predictivemoney) August 27, 2026
सद्गुरु ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वॉलंटियर्स और सपोर्ट टीमें जान का जोखिम उठाकर भी खोज अभियान में शामिल होने के लिए तैयार हैं। नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में राहत कार्य जारी हैं, लेकिन सड़कों के बह जाने और संचार सेवाएं ठप होने से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों की निगाहें प्रशासन की अनुमति और खोज अभियान के नतीजों पर टिकी हैं।
A terrible and tragic flash flood has taken place at Gyirong in Tibet - China, and one of our Kailash groups was caught in it. While on their way back, they were at the immigration office when the flood occurred and the building and much of the town seems to have been flooded.… pic.twitter.com/CqOBxsPlWo
— Sadhguru (@SadhguruJV) August 26, 2026
ग्यिरोंग में मौजूद इमिग्रेशन सेंटर पर बाढ़ का हमला इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक हिस्सा बना हुआ है। जिस जगह पर यात्री सुरक्षित निकलने की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे, वही जगह अचानक तेज पानी और मलबे की चपेट में आ गई। परिवार अब किसी सूचना का इंतजार कर रहे हैं। सद्गुरु और उनकी टीम घटनास्थल तक पहुंचने की अनुमति मांग रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद वे 80 लोग कहां हैं और उनमें से कितने सुरक्षित हैं? जब तक घटनास्थल से आधिकारिक पुष्टि नहीं आती, तब तक उनके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है और राहत एवं तलाश अभियान पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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