
मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित सीजफायर को लेकर कई अहम रिपोर्ट सामने आईं। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका उतनी स्वतंत्र नहीं थी, जितनी पहले बताई जा रही थी। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मीडिएटर या मैसेंजर नहीं, बल्कि अमेरिका के निर्देशों पर काम कर रहा था।
दावा है कि अमेरिका ने खुद सीजफायर का प्रस्ताव तैयार किया और उसे ईरान तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया की तीन अलग-अलग रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान ने सीजफायर प्रक्रिया में वही कदम उठाए, जो उसे अमेरिका से निर्देश के रूप में मिले।
Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने आखिरी समय में पाकिस्तान को ईरान के पास सीजफायर का प्रस्ताव लेकर जाने को कहा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्ताव भी अमेरिका ने ही तैयार किया था और पाकिस्तान से कहा गया कि वह इसे ईरान तक पहुंचाए। बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले 7 अप्रैल को ईरान पर हमला करने की चेतावनी दी थी। हालांकि व्हाइट हाउस के कई वरिष्ठ अधिकारी सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के जरिए समाधान चाहते थे।
The New York Times की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका से ईरान के लिए जो संदेश भेजा गया, उसकी पूरी प्रक्रिया पर व्हाइट हाउस नजर रखे हुए था। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट भी व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ही जारी हुआ था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब ईरान सीजफायर के प्रस्ताव पर तुरंत तैयार नहीं हुआ, तब पाकिस्तान ने चीन से संपर्क किया।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने चीन से संपर्क कर ईरान को मनाने की कोशिश की। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और सीजफायर की संभावना मजबूत हुई। पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत ने भी इस प्रक्रिया में चीन की भूमिका को काफी अहम बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस शामिल हो सकते हैं, जबकि ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ के शामिल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि यह बैठक संभावित फाइनल सीजफायर समझौते को लेकर हो सकती है।
जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार होगा जब इस्लामाबाद में युद्धविराम से जुड़ी इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित हो रही है, वह भी अमेरिका जैसे देश की मौजूदगी में। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस बैठक के जरिए दो लक्ष्य हासिल करना चाहता है:
ईरान ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से कोई बड़ा बयान नहीं दिया है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि दुनिया देख रही है कि अमेरिका सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। यह बयान उस समय आया जब लेबनान में इजराइली हमले की खबरें सामने आई थीं।
ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच यह कूटनीतिक घटनाक्रम केवल एक सीजफायर तक सीमित नहीं है। इसके जरिए यह भी समझा जा रहा है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीति में किन देशों की भूमिका बढ़ने वाली है। अगर इस्लामाबाद में होने वाली बैठक सफल होती है, तो यह न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव कम कर सकती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति को भी मजबूत बना सकती है।
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