क्या लैंडिंग से कुछ सेकंड पहले AN-32 में कोई रहस्यमय तकनीकी खराबी आ गई थी? क्या जोरहाट एयरबेस के पास हुआ यह हादसा पायलट की जान ले चुका है? आखिर विमान से उठते काले धुएं और धमाके के पीछे असली वजह क्या थी? 1986 से 22 से अधिक क्रैश के बाद भी AN-32 विमानों पर सवाल क्यों लगातार गहराते जा रहे हैं?
जोरहाट (असम): शनिवार की एक सामान्य दोपहर अचानक एक खौफनाक चीख और घने काले धुएं के गुबार में तब्दील हो गई। असम के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जोरहाट स्थित रोरियाह एयर फ़ोर्स स्टेशन पर भारतीय वायु सेना (IAF) का एक AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान लैंडिंग के दौरान भीषण हादसे का शिकार हो गया। अरुणाचल प्रदेश से उड़ान भरकर आ रहा यह कार्गो विमान जैसे ही रनवे के करीब पहुंचा, अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया। इस दर्दनाक हादसे में विमान के पायलट की मौत की गंभीर आशंका जताई जा रही है, जबकि अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।

रनवे के ठीक पास... और फिर सब सुन्न हो गया
चश्मदीदों के मुताबिक, विमान अपनी रूटीन उड़ान के बाद रोरियाह एयरपोर्ट पर लैंड करने की तैयारी कर रहा था। सब कुछ सामान्य था, लेकिन पहिए जमीन को छूते, उससे ठीक पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने विमान का संतुलन बिगाड़ दिया। एयरबेस की बाउंड्री वॉल के पास रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने रोंगटे खड़े कर देने वाला आंखों देखा हाल बताया। उसने कहा, "मैंने अचानक विमान का पिछला हिस्सा (टेल सेक्शन) देखा और आसमान में घने काले धुएं का गुबार उठने लगा। विमान अजीब तरह से स्थिर लग रहा था। मैं डरकर उस इलाके से दूर भागने ही वाला था कि तभी एक ऐसा ज़ोरदार धमाका हुआ, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।" धमाके की गूंज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक लोग सहम गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन और खामोशी का वो भारी पल
हादसे की खबर मिलते ही एयरफ़ोर्स स्टेशन के भीतर इमरजेंसी सायरन गूंज उठे। आनन-फानन में फायर टेंडर और मेडिकल टीमों समेत भारी रेस्क्यू ऑपरेशन बल को मलबे की तरफ रवाना किया गया। वायु सेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, "असम के जोरहाट में एयर फ़ोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एक मिलिट्री विमान क्रैश हो गया। यह एक AN-32 कार्गो विमान था, जिसका इस्तेमाल सामान पहुंचाने के लिए किया जाता है। आशंका है कि क्रैश में पायलट की जान चली गई होगी।" फिलहाल घटना स्थल पर मलबे को हटाने और बाकी बचे क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है, लेकिन बेस के भीतर से आ रही खामोशी किसी बड़े नुकसान का इशारा कर रही है।
आखिर क्यों बार-बार 'काल' बन रहा है यह 'सैनिक'?
इस हादसे ने एक बार फिर AN-32 विमानों के सुरक्षा रिकॉर्ड पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 1986 से अब तक भारत में AN-32 विमानों के करीब 22 क्रैश दर्ज हो चुके हैं, जिसमें सबसे हालिया क्रैश साल 2025 में ही हुआ था। लगातार होते इन हादसों के बावजूद, यह सोवियत काल का विमान आज भी भारतीय वायु सेना की रीढ़ बना हुआ है। दुर्गम और पहाड़ी इलाकों, खासकर उत्तर-पूर्व के अग्रिम मोर्चों तक रसद और सैन्य साजो-सामान पहुंचाने में इसकी भूमिका इतनी अहम है कि वायु सेना इसके बिना ऑपरेशन्स की कल्पना भी नहीं कर पाती। लेकिन सवाल वही है कि आखिर कब तक तकनीकी खामियां या मौसम हमारे जांबाज पायलटों की जिंदगी पर भारी पड़ता रहेगा?
उत्तर-पूर्व के आसमान में मंडराता ये कैसा साया?
जोरहाट और इसके आसपास के आसमान में पिछले कुछ समय से हादसों का एक काला साया मंडराता दिख रहा है। रक्षा गलियारों में इस बात को लेकर भी चिंता है कि यह क्रैश उस घटना के कुछ ही महीनों बाद हुआ है, जब जोरहाट एयर बेस से महज 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग ज़िले के बोकाजन सब-डिविज़न में एक सुखोई-30MKI फाइटर जेट रूटीन ट्रेनिंग के दौरान इंगलोंग इकोपी पहाड़ी पर क्रैश हो गया था। बैक-टू-बैक हुए इन हादसों ने वायु सेना को अलर्ट मोड पर ला दिया है। हादसे की असल वजह तकनीकी खराबी थी, मानवीय भूल या फिर अचानक बदला मौसम? इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वायु सेना ने तुरंत एक उच्च स्तरीय 'कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी' (जांच समिति) के गठन के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल, पूरे देश की नजरें जोरहाट से आने वाली अगली आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।


