टैरिफ क्यों बढ़े, डील क्यों रुकी? PM मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया-US ने बताई चौंकाने वाली वजह

Published : Jan 09, 2026, 11:59 AM ISTUpdated : Jan 09, 2026, 12:01 PM IST

US Trade Deal Mystery: क्या PM मोदी की एक कॉल न होने से भारत-अमेरिका ट्रेड डील फेल हो गई? अमेरिका का दावा, देरी से जवाब और बदले टैरिफ ने रिश्तों में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। पूरी कहानी चौंकाने वाली है।

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India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित India-US Trade Deal आखिर क्यों नहीं हो पाई? क्या वाकई एक फोन कॉल की कमी ने अरबों डॉलर की ट्रेड डील को रोक दिया? अमेरिका के वाणिज्य सचिव Howard Lutnick के हालिया बयान ने इस पूरे मुद्दे को रहस्यमय और विवादास्पद बना दिया है। उनके दावे के बाद न सिर्फ टैरिफ बढ़े, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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क्या PM Modi ने Trump को फोन नहीं किया, इसलिए डील रुक गई?

एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील इसलिए पूरी नहीं हो सकी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। लटनिक के अनुसार, डील लगभग तय थी और सिर्फ अंतिम राजनीतिक पुष्टि बाकी थी। उनका कहना है कि ट्रंप व्यक्तिगत रूप से डील को पूरा करना चाहते थे, लेकिन जब तय समय सीमा के भीतर भारत की तरफ से कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ, तो अमेरिका आगे बढ़ गया और अन्य एशियाई देशों के साथ समझौते कर लिए।

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क्या भारत को ट्रेड डील के लिए समय सीमा दी गई थी?

लटनिक के मुताबिक, भारत को ट्रेड डील फाइनल करने के लिए एक स्पष्ट deadline दी गई थी। अमेरिका को उम्मीद थी कि भारत, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों से पहले डील पूरी कर लेगा। इसी उम्मीद में भारत के लिए शुरुआती बातचीत में अपेक्षाकृत उच्च टैरिफ शर्तें रखी गईं। लेकिन जब भारत तय समय में जवाब नहीं दे पाया और बाद में बातचीत के लिए लौटा, तब तक अमेरिका कई अन्य देशों के साथ समझौते कर चुका था।

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लटनिक के दावे में कितनी सच्चाई?

आज की स्थिति यह है कि अमेरिका को भारत के निर्यात पर करीब 50% टैरिफ लगता है। लटनिक का दावा है कि जो देश जल्दी डील पर सहमत हुए, उन्हें कम टैरिफ का फायदा मिला। हालांकि, इस तर्क पर सवाल भी उठते हैं क्योंकि वियतनाम जैसे देशों ने जल्दी डील करने के बावजूद ऊंचे टैरिफ झेले हैं। क्या अमेरिका की नीति वाकई समय-सीमा आधारित थी, या भारत के लिए पहले से ही सख्त रुख अपनाया गया था?

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क्या अमेरिका ने भारत के लिए जानबूझकर कठिन शर्तें रखीं?

आसान शब्दों में समझें तो अमेरिका ने भारत से यह मानकर बातचीत की कि भारत जल्दी समझौता करेगा। इसी वजह से टैरिफ शर्तें ज्यादा सख्त रखी गईं। लेकिन जब भारत ने उन शर्तों पर सहमति नहीं जताई और समय लिया, तो अमेरिका की रणनीति बदल गई। लटनिक ने इसे “छूट चुकी ट्रेन” से तुलना करते हुए कहा कि जब भारत दो-तीन हफ्ते बाद तैयार हुआ, तब तक बाकी देश आगे निकल चुके थे।

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क्या फिर शुरू हो सकती है India-US Trade Deal?

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि India US Trade Talks केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक संतुलन पर भी निर्भर करती हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर आएंगे, या यह मौका हमेशा के लिए निकल चुका है? फिलहाल, अमेरिकी बयान ने सस्पेंस बढ़ा दिया है और भारत-अमेरिका ट्रेड रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है।

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