वेनेजुएला ऑयल पर अमेरिका का यू-टर्न और भारत की स्ट्रैटेजी! रिलायंस की एंट्री से बदलेगा गेम!
Global Energy Shift: अमेरिका के बड़े पॉलिसी संकेत के बाद भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल मिल सकता है। रिलायंस ने दिलचस्पी दिखाई है। क्या यह डील भारत की ऊर्जा जरूरतों और ग्लोबल तेल बाजार की दिशा बदल देगी?

India Venezuela Oil Deal: भारत की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की इजाज़त दे सकता है, वह भी एक US-नियंत्रित बिक्री सिस्टम के तहत। इस खबर के बाद न सिर्फ ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल तेज़ हुई है, बल्कि भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है।
अमेरिका ने अचानक वेनेजुएला के तेल पर रुख क्यों बदला?
व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल को लेकर अपनी पुरानी सख्त नीति में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। वजह साफ है-
- भारत जैसे देश की तेज़ी से बढ़ती एनर्जी डिमांड
- ग्लोबल मार्केट में तेल की बढ़ती ज़रूरत
- और वेनेजुएला के तेल भंडार का दोबारा इस्तेमाल
हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि यह बिक्री पूरी तरह उसके नियंत्रण में होगी और इससे होने वाली कमाई अमेरिकी निगरानी वाले अकाउंट्स में रखी जाएगी।
US-कंट्रोल्ड सिस्टम में तेल बिकेगा तो फायदा किसे होगा?
अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस्टोफर राइट के अनुसार, यह सिस्टम इसलिए बनाया जा रहा है ताकि तेल से मिलने वाला पैसा भ्रष्टाचार में न जाए और आखिरकार उसका फायदा वेनेजुएला के आम लोगों तक पहुंचे। इस मॉडल के तहत अमेरिका खुद यह तय करेगा कि तेल कहां, किसे और कैसे बेचा जाएगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज क्यों दिखा रही है इतनी दिलचस्पी?
भारत में जामनगर स्थित रिलायंस का रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स दुनिया के सबसे बड़े और एडवांस रिफाइनिंग प्लांट्स में से एक है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल ऐसी ही कॉम्प्लेक्स रिफाइनरियों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। रिलायंस ने साफ कहा है कि “अगर गैर-अमेरिकी खरीदारों को नियमों के तहत अनुमति मिलती है, तो हम वेनेजुएला से तेल खरीदने पर विचार करेंगे।”
क्या भारत को सस्ता और स्थिर तेल सप्लाई मिल सकती है?
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत, खासकर रिलायंस जैसी कंपनियां, वेनेजुएला के तेल की बड़ी खरीदार थीं। अगर यह ट्रेड दोबारा शुरू होता है तो भारत के क्रूड ऑयल सोर्सेज में विविधता आएगी, तेल आयात पर निर्भरता संतुलित होगी और बढ़ती एनर्जी डिमांड को संभालना आसान होगा।
क्या इसका असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ेगा?
बिल्कुल। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित तेल भंडार है और भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है। ऐसे में यह नया ट्रेड कॉरिडोर खुलता है, तो इसका असर ग्लोबल ऑयल प्राइस, सप्लाई चेन और जियो-पॉलिटिक्स-तीनों पर पड़ सकता है।

