
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन देशवासियों से ईंधन बचाने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की है। सोमवार को गुजरात के वडोदरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने खास तौर पर “वर्क फ्रॉम होम”, “ऑनलाइन क्लास” और “कार पूलिंग” को अपनाने पर जोर दिया। 24 घंटे के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री की ओर से की गई यह अपील अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञ इसे बढ़ते वैश्विक संकट और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच सरकार का एक बड़ा संकेत मान रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में हर नागरिक की छोटी कोशिश भी देश के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा, “मैं देश के हर नागरिक से अपील करता हूं कि पेट्रोल-डीजल का उपयोग जितना संभव हो कम करें। मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें।” उन्होंने कार पूलिंग को बढ़ावा देते हुए कहा कि जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं, वे एक ही कार में ज्यादा लोगों के साथ यात्रा करें ताकि ईंधन की बचत हो सके।
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प्रधानमंत्री ने डिजिटल तकनीक को मौजूदा समय की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सरकारी और निजी दफ्तरों से वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज तकनीक की मदद से कई काम बिना यात्रा किए आसानी से किए जा सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े शहरों में दफ्तरों का कुछ हिस्सा फिर से हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाता है, तो ट्रैफिक और ईंधन खपत दोनों में कमी आ सकती है।
पीएम मोदी ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों से भी ऑनलाइन क्लास का विकल्प अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कोविड काल के बाद भारत में ऑनलाइन शिक्षा का ढांचा पहले से काफी मजबूत हुआ है और अब सरकार इसे ऊर्जा बचत के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रही है।
राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की यह लगातार दूसरी अपील केवल सामान्य सलाह नहीं मानी जा रही। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं, तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी संदर्भ में सरकार अब ईंधन बचत, डिजिटल कार्य संस्कृति और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देती नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लोगों से स्थानीय उत्पाद अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशी सामान के बजाय भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देना देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगा। इसके साथ ही उन्होंने विदेशों में होने वाली डेस्टिनेशन वेडिंग की बजाय भारत में ही शादी और बड़े आयोजन करने की सलाह दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह संदेश केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है। यह देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने, विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में सामूहिक भागीदारी का संदेश भी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार की इस अपील का आम लोगों, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों पर कितना असर पड़ता है।
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