Ittihad-ul-Mujahideen Pakistan New Terror Group: पाकिस्तान में उभरे नए आतंकी संगठन इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने बन्नू में बड़ा हमला कर 15 सैनिकों की हत्या कर दी। जानिए इस खतरनाक संगठन की पूरी कहानी, इसके गठन, मकसद और पाकिस्तान-अफगानिस्तान कनेक्शन का पूरा सच।
Who Is Ittihad ul Mujahideen: पाकिस्तान पहले से ही आतंकवाद, कट्टरपंथ और आतंकी संगठनों की चुनौती से जूझ रहा है, लेकिन अब वहां एक नए आतंकी संगठन ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के बाद अब इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन नाम का संगठन तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। इस संगठन ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू इलाके में बड़ा हमला कर 15 सैनिकों की हत्या कर दी है।

यह हमला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान की सेना लंबे समय से दावा करती रही है कि बन्नू और आसपास के इलाकों पर उसका मजबूत नियंत्रण है। ऐसे में इतनी बड़ी आतंकी वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह भी पढ़ें: Delhi NCR Expressway: जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा मिनटों का खेल, सरकार ला रही मेगा प्लान
आत्मघाती हमले से दहला बन्नू
रविवार को हुए इस हमले में आतंकियों ने आत्मघाती रणनीति अपनाई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन से जुड़े आतंकियों ने सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया, जिसमें 15 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई। यह इस साल पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया और सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
क्या है इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन?
इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन की स्थापना 11 अप्रैल 2025 को हुई थी। हालांकि एक साल तक यह संगठन बड़े हमलों की बजाय प्रचार और नेटवर्क मजबूत करने में लगा रहा। अब बन्नू हमले के बाद यह संगठन अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संगठन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में कट्टर इस्लामी शासन स्थापित करना है। इसकी विचारधारा काफी हद तक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसी मानी जा रही है।
तीन आतंकी गुटों के गठजोड़ से बना संगठन
बीबीसी मॉनिटरिंग की रिपोर्ट के मुताबिक खैबर इलाके में सक्रिय तीन कट्टरपंथी संगठनों ने मिलकर इस नए आतंकी संगठन का गठन किया था। इनमें इस्लामिक क्रांति, लश्कर-ए-इस्लाम और हाफिज गुल बहादुर का गुट शामिल बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि हाफिज गुल बहादुर के संगठन को कभी पाकिस्तान सरकार ने “गुड तालिबान” कहकर अलग नजरिए से देखा था। लेकिन अब इसी नेटवर्क से जुड़ा नया संगठन पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा बना गतिविधियों का केंद्र
इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन की अधिकतर गतिविधियां पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में देखी जा रही हैं। यह क्षेत्र अफगानिस्तान सीमा के बेहद करीब है और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। बताया जा रहा है कि संगठन सोशल मीडिया और खासतौर पर टेलीग्राम का इस्तेमाल प्रचार के लिए कर रहा है। इसके चैनलों पर पश्तो, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में वीडियो और संदेश साझा किए जाते हैं। महमूदुल हसन नाम के आतंकी को संगठन का प्रवक्ता माना जाता है।
संगठन का कोई घोषित सरगना नहीं
सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस संगठन को ट्रैक करना आसान नहीं माना जा रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना के ऑपरेशन से बचने के लिए संगठन ने किसी एक बड़े सरगना या कमांडर को सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं रखा है। यही वजह है कि अब तक इस संगठन की आंतरिक संरचना और नेतृत्व के बारे में बहुत कम जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति संगठन को लंबे समय तक गुप्त तरीके से संचालित करने में मदद कर सकती है।
पहले प्रचार, अब बड़ा हमला
गठन के बाद पिछले एक साल तक इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन मुख्य रूप से प्रचार सामग्री जारी करता रहा। इसके वीडियो में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने और विस्फोट करने जैसे दृश्य दिखाए गए थे। कुछ वीडियो में पाकिस्तान सेना को खुली धमकियां भी दी गई थीं। हालांकि उस समय तक संगठन ने किसी बड़े हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। बन्नू हमला अब तक की उसकी सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक कार्रवाई मानी जा रही है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर लगाए आरोप
हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने इसके तार अफगानिस्तान से जोड़ने की कोशिश की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि आतंकियों को अफगानिस्तान से समर्थन मिला और उसी के इशारे पर यह हमला कराया गया। हालांकि अफगानिस्तान की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमा सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर तनाव बना हुआ है।
क्या बढ़ सकता है नए संगठन का प्रभाव?
विश्लेषकों का मानना है कि बन्नू हमले के बाद इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन का प्रभाव तेजी से बढ़ सकता है। हाल के महीनों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने कुछ इलाकों में अपने हमले कम किए हैं, जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी भी पहले जितनी सक्रिय नहीं दिख रही। ऐसे में नया संगठन कट्टरपंथी नेटवर्क में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि देश पहले ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
यह भी पढ़ें: बंगाल में सत्ता बदलते ही बड़ा एक्शन, शुभेंदु अधिकारी ने पहली बैठक में लिए चौंकाने वाले फैसले
