क्या होती है DVT बीमारी? जिससे 5 साल से जूझ रहे थे प्रतीक यादव, बस ये एक जिद बन गई काल!

Published : May 14, 2026, 09:13 AM IST

38 की उम्र, ICU से अचानक छुट्टी, रहस्यमयी DVT बीमारी, बार-बार गिरना और फिर मौत! प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम ने खोले कई चौंकाने वाले राज। क्या था मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म का सच? स्टेरॉयड थ्योरी भी निकली गलत। 

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Prateek Yadav Death: उत्तर प्रदेश के सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवारों में से एक, यादव कुनबे के सदस्य प्रतीक यादव की मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। गठीला शरीर, फिटनेस का जुनून और अचानक मौत-इन सबने लोगों को स्टेरॉयड, साज़िश और रहस्य की तरफ सोचने पर मजबूर कर दिया। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों के खुलासों ने एक ऐसी सच्चाई सामने रखी, जो किसी थ्रिलर से कम नहीं, बल्कि बेहद दर्दनाक थी।

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सालों से छिपा था एक 'खामोश कातिल': क्या था DVT का रहस्य?

प्रतीक यादव केवल 38 वर्ष के थे और बाहर से पूरी तरह फिट नजर आते थे। लेकिन उनकी डॉक्टर ने खुलासा किया कि पिछले 5 वर्षों से वे DVT (डीप वेन थ्रोम्बोसिस) नाम की एक खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी में शरीर की गहरी नसों, खासकर पैरों में खून के थक्के (Clots) जम जाते हैं। प्रतीक सालों से खून पतला करने वाली दवाओं (Blood Thinners) पर थे। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक ऐसा 'खामोश कातिल' है जो किसी भी समय नस से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिसे 'पल्मोनरी एम्बोलिज़्म' कहा जाता है।

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क्याें होती है डीप वेन थ्रोम्बोसिस बीमारी और क्या हैं लक्षण?

DVT (डीप वेन थ्रोम्बोसिस) शरीर की गहरी नसों में, विशेषकर पैरों में, खून का थक्का (Blood Clot) जमने की एक गंभीर स्थिति है। यह तब होता है जब नसों में रक्त का बहाव धीमा हो जाता है या रुक जाता है, जिससे पैर में सूजन, तेज दर्द, और लालिमा आ सकती है। इसे तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है क्योंकि थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) कहते हैं, जो जानलेवा हो सकता है।

डीवीटी के मुख्य लक्षण (Symptoms)

  • पैर में सूजन: आमतौर पर एक ही पैर (पिंडली या जांघ) में अचानक सूजन आना।
  • दर्द या ऐंठन: पैर में दर्द, विशेषकर चलने या खड़े होने पर।
  • त्वचा का रंग बदलना: प्रभावित हिस्सा लाल या बैंगनी दिखना।
  • गर्मी महसूस होना: त्वचा का प्रभावित हिस्सा आसपास की त्वचा की तुलना में गर्म महसूस होना।
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29 अप्रैल: जब हालात अचानक बिगड़ गए

29 अप्रैल को प्रतीक ने सीने में दर्द, सांस फूलने और चक्कर आने की शिकायत की। डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें ICU में भर्ती कर लिया। शुरुआती इलाज के बाद हालत स्थिर होती दिखाई दी, लेकिन तभी कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया।

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ICU की वो आखिरी रात: “मुझे घर जाना है…” जब 'ज़िद' के आगे बेबस हुए डॉक्टर

डॉक्टर ने बताया कि 1 मई को प्रतीक ने डॉक्टरों से अस्पताल छोड़ने की जिद की। डॉक्टरों ने साफ कहा कि ICU छोड़ना उनके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। मेडिकल रिकॉर्ड में इसे LAMA यानी “Leave Against Medical Advice” दर्ज किया गया। उनकी पत्नी अपर्णा यादव ने उन्हें रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी, डॉक्टरों ने इसे "खुदकुशी" के बराबर बताया, लेकिन प्रतीक नहीं माने। वे बस अपने घर और बच्चों के पास जाना चाहते थे। ICU की मशीनों की आवाज़, अस्पताल का माहौल और बच्चों की याद-इन सबने उनके फैसले को और मजबूत कर दिया। उन्होंने कागजों पर हस्ताक्षर किए और अस्पताल छोड़ दिया।

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पोस्टमॉर्टम की परतें: स्टेरॉयड की अटकलें खारिज, 6 चोटों का सच

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उन तमाम अफवाहों पर विराम लगा दिया है जिनमें स्टेरॉयड या नशीले पदार्थों के सेवन की बात कही जा रही थी। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि मौत का कारण 'मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म' था। शरीर पर मिली 6 चोटों के पीछे का सस्पेंस भी अब साफ हो गया है। दरअसल, प्रतीक ब्लड थिनर पर थे, जिसकी वजह से मामूली गिरने पर भी गहरे जख्म उभर आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चोटें दो बार गिरने से लगी थीं-एक बार 29 अप्रैल को अस्पताल जाने से पहले और दूसरी बार मौत से ठीक पहले घर पर बेहोश होने के दौरान।

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एक अधूरा 'ब्रेक' और ज़िंदगी का सबक

प्रतीक यादव की कहानी एक जवान पिता की कहानी है जो शायद अपनी बीमारी की गंभीरता को अपनी ज़िद के आगे छोटा समझ बैठा। उन्हें लगा कि घर जाकर वे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन उनके शरीर के अंदर छिपा वो खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच चुका था। प्रतीक की मौत केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं है, बल्कि एक कड़ा सबक है कि अस्पताल की घुटन और मशीनों की 'बीप-बीप' असल में ज़िंदगी की धड़कनों को सुरक्षित रखने के लिए होती है। आज प्रतीक हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यह दास्तां चिकित्सा सलाह की अहमियत को हमेशा के लिए रेखांकित कर गई है।

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