आखिर मौत से पहले क्या हुआ था? पोस्टमार्टम में प्रतीक यादव के शरीर पर मिलीं अलग-अलग समय की 6 चोटें

Published : May 14, 2026, 08:18 AM IST

Prateek Yadav Postmortem: लखनऊ में प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम में 6 एंटीमॉर्टम चोटें, फेफड़ों में खून का थक्का और कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर का खुलासा हुआ। अखिलेश यादव के सौतेले भाई की मौत ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक सनसनी फैला दी है।

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Prateek Yadav Postmortem Report: लखनऊ की सियासत और समाजवादी परिवार के भीतर हलचल उस वक्त और तेज हो गई, जब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के सौतेले भाई प्रतीक यादव (Prateek Yadav) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में मौत की वजह “मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म” यानी फेफड़ों में खून का थक्का जमने से कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर बताई गई, लेकिन शरीर पर मिली 6 एंटीमॉर्टम चोटों ने पूरे मामले को रहस्य और विवाद के घेरे में ला दिया है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) द्वारा जारी उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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 फेफड़ों में 'खून का थक्का': मौत की मेडिकल मिस्ट्री

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक यादव की मौत का प्राथमिक कारण "मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म" के कारण हुआ कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर बताया गया है। सरल भाषा में कहें तो, उनके फेफड़ों की धमनियों में खून का एक बड़ा थक्का जम गया था, जिससे सांस लेने और हृदय की कार्यप्रणाली अचानक रुक गई। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म अक्सर शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे पैरों) से थक्के के फेफड़ों तक पहुंचने के कारण होता है। डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए उनके दिल और अन्य आंतरिक अंगों को रासायनिक विश्लेषण (Visceral Analysis) के लिए सुरक्षित रख लिया है।

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6 रहस्यमयी चोटें: मौत से पहले क्या हुआ था?

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उनके शरीर पर मिली 6 'एंटीमॉर्टम' (मौत से पहले की) चोटें हैं। पोस्टमार्टम में प्रतीक के सीने, दाहिनी बांह, कलाई, कोहनी और बाईं कलाई पर चोट के निशान पाए गए हैं। सस्पेंस तब और बढ़ गया जब रिपोर्ट में बताया गया कि ये चोटें अलग-अलग समय की हैं। चोट संख्या 1, 2 और 3 लगभग 5 से 7 दिन पुरानी हैं, जबकि 4, 5 और 6 लगभग एक दिन पुरानी बताई जा रही हैं। हालांकि प्रतीक लिवर और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे और मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन ये बाहरी चोटें अब चर्चा का विषय बन गई हैं।

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अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई थीं सांसें

घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार सुबह लगभग 6:15 बजे परिजन प्रतीक को आनन-फानन में सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जी.सी. गुप्ता ने पुष्टि की कि प्रतीक को 'मृत अवस्था' (Brought Dead) में लाया गया था। जब यह हादसा हुआ, उनकी पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा यादव शहर में मौजूद नहीं थीं। इस खबर के मिलते ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

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विवादों और सुलह के बीच का सफर

प्रतीक यादव का जीवन अक्सर सुर्खियों में रहा। 1988 में जन्मे प्रतीक ने बड़े भाई अखिलेश के उलट राजनीति से दूरी बनाए रखी और रियल एस्टेट व जिम व्यवसाय में अपनी पहचान बनाई। हालांकि, उनका निजी जीवन हाल के वर्षों में उथल-पुथल भरा रहा। इसी साल की शुरुआत में उन्होंने अपनी पत्नी अपर्णा यादव पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिससे पारिवारिक कलह सार्वजनिक हो गई थी। हालांकि, 28 जनवरी को उन्होंने सुलह की घोषणा कर सबको चौंका दिया था। उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल एक परिवार को तोड़ा है, बल्कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इन 'निशानों' ने एक ऐसी अनसुलझी पहेली छोड़ दी है, जिसका जवाब अब जांच एजेंसियां तलाशेंगी।

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सोशल मीडिया पर साजिश के दावे, जांच का इंतजार

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर साजिश, पारिवारिक तनाव और राजनीतिक एंगल को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी एजेंसी ने किसी आपराधिक पहलू की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, अंतिम मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन एक बात साफ है—प्रतीक यादव की मौत ने सिर्फ एक परिवार को नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी गहरे सवालों के बीच खड़ा कर दिया है।

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प्रमुख बिंदु एक नज़र में

  • मौत का कारण: पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म (फेफड़ों में खून का थक्का)।
  • चोटें: शरीर पर 6 चोटें मिलीं, जिनमें से 3 एक दिन पुरानी हैं।
  • अंतिम समय: सुबह 6:15 बजे अस्पताल ले जाए गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
  • विरासत: फिटनेस और रियल एस्टेट के प्रति जुनूनी थे, राजनीति से रहे दूर।

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