शिव जयंती पर शिवनेरी किला हादसा: भगदड़ में 6 घायल, क्या भीड़ प्रबंधन में हुई बड़ी चूक?

Published : Feb 19, 2026, 10:19 AM IST

Breaking News: क्या शिव जयंती पर शिवनेरी किले में भीड़ का अंदाज़ा चूक गया? हाथी दरवाज़ा और गणेश दरवाज़ा पर अचानक बढ़े दबाव से भगदड़ जैसी स्थिति, 6 घायल। क्या यह सिर्फ अव्यवस्था थी या भीड़ प्रबंधन की बड़ी कमी? सवालों के घेरे में प्रशासन।

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Shivneri Fort Stampede: शिव जयंती के मौके पर पुणे जिले के जुन्नार तालुका में छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान शिवनेरी किले में भारी भीड़ जमा होने पर भगदड़ जैसी स्थिति होने पर कम से कम आधा दर्जन लोग घायल हो गए। भक्त, शिव ज्योति (औपचारिक लौ) लेकर युवाओं के ग्रुप और पूरे महाराष्ट्र से अलग-अलग संगठनों के सदस्य देर रात किले में जमा हो गए। इस वजह से, मुख्य समारोह से काफी पहले ही किला परिसर खचाखच भर गया था। राहत की बात यह रही कि किसी की मौत की खबर नहीं है।

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क्या जरूरत से ज्यादा भीड़ बनी हादसे की वजह?

शिव जयंती पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस बार भी महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से भक्त, युवा समूह और विभिन्न संगठन “शिव ज्योति” लेकर देर रात से ही किले में पहुंचने लगे। सुबह मुख्य कार्यक्रम से पहले ही किला परिसर खचाखच भर गया। भीड़ बढ़ने के साथ संकरे रास्तों पर दबाव बढ़ता गया और हालात काबू से बाहर होते नजर आए।

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क्या हाथी दरवाज़ा और गणेश दरवाज़ा बने जोखिम वाले पॉइंट?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अंबरखाना क्षेत्र के नीचे की तंग जगहों, खासकर हाथी दरवाज़ा और गणेश दरवाज़ा के एंट्रेंस पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ आगे बढ़ने लगे तो रास्ता जाम हो गया। इसी दौरान अफरा-तफरी मची और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस हंगामे में महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए। सभी घायलों को तुरंत जुन्नार के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

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क्या पुलिस तैनाती कम थी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि भीड़ के हिसाब से पुलिस बल कम था। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतज़ाम नहीं दिखे। हालांकि बाद में पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया और हालात सामान्य किए। हर साल शिव जयंती पर लाखों लोग पहुंचते हैं, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भीड़ प्रबंधन की तैयारी कमजोर रही?

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क्या मुख्यमंत्री कार्यक्रम से पहले बढ़ा दबाव?

जानकारी के मुताबिक, इस साल के मुख्य समारोह में देवेंद्र फडणवीश के शामिल होने की संभावना थी। सुबह 9 बजे कार्यक्रम तय था, जिससे पहले ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ गई। वीआईपी मूवमेंट और सुरक्षा व्यवस्था के कारण भी सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे भीड़ और सघन हो गई।

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