महासचिव के ऊपर या नीचे? राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्रा की असली भूमिका क्या होगी

Published : Sep 02, 2026, 07:16 PM IST
Ram Mandir Trust CEO Why Was a CEO Appointed Despite the Existing Secretary Post

सार

राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया है। महासचिव के रहते CEO की नई कुर्सी क्यों बनाई गई और दोनों के अधिकारों में क्या अंतर होगा? जानिए अयोध्या के नए प्रशासनिक मॉडल की पूरी कहानी।

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव हुआ है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। फैसला 2 सितंबर 2026 को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में लिया गया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्रस्ट में महासचिव का पद पहले से मौजूद है, तो CEO की नई कुर्सी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

राम मंदिर के लिए CEO मॉडल क्यों जरूरी हुआ?

राम मंदिर अब निर्माण परियोजना से आगे बढ़कर एक विशाल धार्मिक परिसर के रूप में काम कर रहा है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और भविष्य में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

ऐसे में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, सफाई, VIP मूवमेंट, कर्मचारियों की निगरानी और जिला प्रशासन के साथ समन्वय जैसे रोजमर्रा के कामों के लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत महसूस की गई। इसी सोच के तहत ट्रस्ट ने CEO मॉडल अपनाया है।

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CEO और महासचिव में क्या अंतर होगा?

नए मॉडल में CEO मंदिर प्रशासन का कार्यकारी चेहरा होगा। वह रोजमर्रा की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट के फैसलों को लागू करने की जिम्मेदारी संभालेगा। वहीं नीति, वित्त और शासन से जुड़े बड़े अधिकार महासचिव के पास बने रहेंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक CEO महासचिव को रिपोर्ट करेगा और उसके कार्यों की समीक्षा भी महासचिव के स्तर पर होगी। सरल शब्दों में कहें तो CEO का काम फैसलों को जमीन पर लागू करना होगा, जबकि बड़े नीतिगत और वित्तीय फैसलों का केंद्र महासचिव रहेगा।

5,585 आवेदनों में से कैसे हुआ चयन?

CEO पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन आने की जानकारी सामने आई। इनमें प्रशासनिक सेवाओं, पुलिस, सेना और अन्य क्षेत्रों से जुड़े उम्मीदवार शामिल थे। लंबी चयन प्रक्रिया के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने भारतीय वायुसेना में लंबा करियर बिताया है और पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव भी बताया गया है।

ट्रस्ट का कॉरपोरेट स्टाइल प्रशासन मॉडल

ट्रस्ट का नया ढांचा बड़े संस्थानों की तरह कामकाज को अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। एक अधिकारी रोजमर्रा के प्रशासन पर फोकस करेगा, जबकि महासचिव रणनीति और बड़े फैसलों पर ध्यान दे सकेगा।

ट्रस्ट में नए सदस्यों को शामिल करने की जानकारी भी सामने आई है, जिसमें निर्मला यादव के पहली महिला ट्रस्टी बनने की बात कही गई है।

कुल मिलाकर CEO की नियुक्ति राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव जरूर है, लेकिन सत्ता का मूल समीकरण बदलने के बजाय कामकाज का बंटवारा अधिक स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस नए मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि CEO और महासचिव के अधिकारों और जिम्मेदारियों की सीमा कितनी स्पष्ट रूप से तय होती है।

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