Ram Mandir CEO Jitendra Mishra: राम मंदिर के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा के अबतक के करियर के बारे में जानिए। कैसे देवरिया के गांव से निकल कर एयर मार्शल बने और अब राम मंदिर की कमान संभालने तक का पूरा सफर।
Jitendra Mishra Biography: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के रूप में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद उनकी प्रोफाइल चर्चा में है। खासकर यह जानने की दिलचस्पी बढ़ी है कि देवरिया के भोपतपुरा गांव से निकलकर जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक कैसे पहुंचे और अब अयोध्या के राम मंदिर की जिम्मेदारी तक उनका सफर कैसे पहुंचा। जानिए राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा के करियर, एजुकेशन, लाइफ की रोचक बातें।
भोपतपुरा गांव से शुरू हुआ जितेंद्र मिश्रा का सफर
जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपार रानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। हालांकि, उनके परिवार और निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है। उनकी सार्वजनिक प्रोफाइल का सबसे मजबूत हिस्सा उनका करीब चार दशक लंबा सैन्य करियर है।
Jitendra Mishra Education: जितेंद्र मिश्रा का शानदार एजुकेशन क्वालिफिकेशन
जितेंद्र मिश्रा की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA), खड़कवासला और एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल से सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल से टेस्ट पायलट की विशेष ट्रेनिंग ली। अपने करियर में आगे बढ़ते हुए उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी उच्च स्तर की सैन्य और रणनीतिक पढ़ाई की। जितेंद्र मिश्रा के शुरुआती स्कूली पढ़ाई के बारे डिटेल फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
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जितेंद्र मिश्रा का करियर: 6 दिसंबर 1986 को शुरू हुआ एयरफोर्स का सफर
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हासिल किया। करीब 38 साल की सेवा के दौरान उन्होंने 18 से अधिक तरह के विमानों को उड़ाया और 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव हासिल किया। फाइटर पायलट के साथ-साथ वह कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के तौर पर भी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनके करियर में सिर्फ उड़ान का अनुभव ही नहीं रहा, बल्कि बड़े संगठनों और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों को संभालने की जिम्मेदारी भी शामिल रही।
वेस्टर्न एयर कमांड की संभाली कमान
मिश्रा भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड में से एक है। इसके अलावा वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ जैसी अहम जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके अनुभव में बड़े सैन्य संगठनों का नेतृत्व, ऑपरेशनल प्लानिंग और अलग-अलग एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल रहा है। उनके करियर में अमेरिका और ब्रिटेन के प्रमुख रक्षा संस्थानों में प्रशिक्षण भी शामिल रहा है।
जितेंद्र मिश्रा की उपलब्धियां: कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक
जितेंद्र मिश्रा का नाम 1999 के कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा है। बाद के वर्षों में उन्होंने भारतीय वायुसेना में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाल रहे थे, जिसके बाद उनकी सैन्य प्रोफाइल एक बार फिर सुर्खियों में आई। उनकी सेवाओं को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक (SYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) जैसे सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
जितेंद्र मिश्रा: अब अयोध्या में नई भूमिका
भारतीय वायुसेना में लंबी सेवा के बाद अब जितेंद्र मिश्रा के करियर का नया अध्याय राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में शुरू हुआ है। 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर फैसला लिया गया। राम मंदिर के बढ़ते संचालन, श्रद्धालुओं की व्यवस्था, सुरक्षा, स्टाफ और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे कामों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मिश्रा अपने साथ सैन्य अनुशासन, नेतृत्व और बड़े संस्थानों को संचालित करने का अनुभव लेकर इस नई जिम्मेदारी में आए हैं।
भोपतपुरा से शुरू हुआ यह सफर अब अयोध्या तक पहुंच चुका है। एक फाइटर पायलट से एयर मार्शल और अब राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO तक, जितेंद्र मिश्रा के करियर का यह बदलाव इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी नई भूमिका पूरी तरह अलग क्षेत्र की है, लेकिन इसमें भी बड़े स्तर के प्रबंधन और समन्वय की उतनी ही जरूरत होगी।
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राम मंदिर CEO जितेंद्र मिश्रा की फैमिली में कौन-कौन?
जितेंद्र मिश्रा के परिवार की बात करें तो उनकी निजी जिंदगी और परिवार के सदस्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध है। उपलब्ध रिपोर्टों में इतना जरूर बताया गया है कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता पेशे से एक लेक्चरर थे। हालांकि, जितेंद्र मिश्रा की पत्नी, बच्चों, माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम और पेशे की पुख्ता जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
