Jitendra Mishra First CEO of Ram Mandir : आखिरकार लंबी प्रक्रिया के बाद अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को पहला सीईओ मिल ही गया। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाया गया है। अब लोग जानना चाहते हैं कि उनमें ऐसी क्या खासियत थी जो उनको ही यह पद दिया गया।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश): श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीएओ पद के नाम का ऐलान हो गया है। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अब राम मंदिर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) होंगे। एक महीने से ज्यादा की कड़ी मशक्कत और प्रक्रिया के बाद उनका चयन हुआ। हालांकि इस रेस में कई दिग्गजों के नाम शामिल थे, लेकिन कैसे जितेंद्र मिश्रा ने सबको पीछे छोड़ते हुए यह कुर्सी हासिल कर ली। आखिर उनमें ऐसी क्या खासियत है जो 5500 आवदनों में से नंबर-1 पर आ गए और कमेटी को पसंद आ गए। आइए जानते हैं वह वजह...
1. सैन्य नेतृत्व का लंबा अनुभव...सबसे बड़ी वजह
बता दें कि जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के सीनियर अधिकारी रह चुके हैं। अधिकारी रहे हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन मिला था। उन्होंने NDA पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल और अमेरिका के Air Command and Staff College के अलावा ब्रिटेन के Royal College of Defence Studies में प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं। जनवरी 2025 में उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली थी। उन्हें लीडरशिप का लंबा अनुभव है। साथ ही अनुशासन के वह पक्के हैं।
2. ऑपरेशन सिंदूर का टास्क
जितेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया था। उन्हें जो टास्क दिया गया था वह उन्होंने समय से पहले पूरा कर लिया था। यही सैन्य ऑपरेशनल अनुभव उनके प्रोफाइल को दूसरे प्रशासनिक उम्मीदवारों से अलग बनाता है। हो सकता है कि इसी वजह से राम मंदिर समीति को वह पसंद आए हो और उनको सीईओ बनाया गया हो।
3. प्रोफेशनल मैनेजमेंट में बड़ी भूमिका
बता दें कि राम मंदिर में रोजाना लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। तो ऐसे में उनकी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों, सुविधाओं और भविष्य के विस्तार जैसे कई स्तरों पर प्रशासनिक चुनौतियां हैं। इसलिए ट्रस्ट लंबे समय से एक प्रोफेशनल मैनेजमेंट वाले इंसान की जरूरत थी। जो शायद जितेंद्र मिश्रा में है। क्योंकि उनको सैन्य नेतृत्व, बड़े ऑपरेशनल कमांड का अनुभव, रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता और विशाल स्तर की व्यवस्था को संभालने का अनुभव।
4. यूपी कनेक्शन
जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश ते तालुक रखते हैं। वह मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं। ऐसे में उनका यूपी से होना भी उनके चयन के लिए फायदे मंद रहा। क्योंकि लोकल के व्यक्ति को ज्यादा जानकारी होती है। इस हिसाब से और राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की नियुक्ति में प्लस प्वाइंट रहा।
राम मंदिर के CEO में चाहिए थीं ऐसी क्वलिटी
आपको बता दें कि राम मंदिर के पहले CEO को चुनने के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने एक दिन पहले ही अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी थी। इस पद के लिए 5,000 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था, जिनकी कड़ी स्क्रीनिंग के बाद कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है। कमेटी ने साफ तौर पर कहा था कि जिस व्यक्ति को मंदिर का CEO नियुक्त किया जाएगा, उसमें संगठन चलाने की मजबूत क्षमता होगी और वह श्री राम लला की सेवा के लिए पूरी तरह से समर्पित होगा। यह कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसमें सांगठनिक क्षमता हो, जो श्री राम लला की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हो। इससे प्रबंधन और मजबूत होगा और मंदिर का कामकाज व्यवस्थित तरीके से चलेगा। तो जितेंद्र मिश्रा में यह सारी क्वलिटी हैं, जैसा ट्रस्ट चाहता था।


