बसपा में मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी रहे आकाश आनंद को फिर बड़ी जिम्मेदारियों से दूर किया गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी Facebook पोस्ट और आक्रामक राजनीतिक शैली इसकी वजह बनी? मायावती ने उन्हें राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया है।
कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी, कभी BSP का युवा चेहरा और अब एक बार फिर पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर। आकाश आनंद का राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। लेकिन इस बार सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मायावती ने उन्हें पीछे क्यों किया, बल्कि चर्चा यह भी है कि क्या उनकी एक Facebook पोस्ट और आक्रामक राजनीतिक शैली पार्टी नेतृत्व को रास नहीं आई? लखनऊ में 3 सितंबर को हुई BSP की अहम बैठक में मायावती ने साफ कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
दलित कैब ड्राइवर के मुद्दे से शुरू हुई चर्चा
अगस्त में लखनऊ के दलित कैब ड्राइवर अंकित कुमार से जुड़े विवाद को आकाश आनंद ने सोशल मीडिया पर उठाया था। अंकित ने जातिसूचक टिप्पणियों और बाद में अपना Rapido अकाउंट सस्पेंड होने का आरोप लगाया था। आकाश ने सवाल उठाते हुए मामले को जातिगत सम्मान और सामाजिक भेदभाव से जोड़ा। बाद में उन्होंने इसे आरक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर चल रही जाति की बहस से भी जोड़ दिया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत की आरक्षण संबंधी टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए उन्होंने तीखे सवाल किए। हालांकि, मायावती ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि किसी एक सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से आकाश को जिम्मेदारियों से दूर किया गया। इसलिए पोस्ट और मौजूदा फैसले के बीच सीधा संबंध स्थापित करना फिलहाल राजनीतिक अटकल ही माना जाएगा।
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पोस्ट हटी, फिर शुरू हुई नई चर्चा
बाद में आकाश की वह सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी गई। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हुईं, हालांकि पोस्ट हटाने के पीछे मायावती की नाराजगी थी, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद हाथरस की एक सभा में आकाश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया। उनके इस बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई और अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए चर्चा को शिक्षा और आरक्षण के मुद्दों की ओर मोड़ दिया।
तीसरी बार लगा बड़ा झटका
आकाश आनंद के राजनीतिक करियर में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े बदलाव आए हैं। 2024 में विवादित भाषण के बाद उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक पद और उत्तराधिकारी की भूमिका से हटाया गया था। बाद में उनकी वापसी हुई, लेकिन जिम्मेदारियों में बदलाव का दौर जारी रहा। अब मायावती ने एक बार फिर उनकी राजनीतिक परिपक्वता को मुद्दा बनाते हुए बड़ी जिम्मेदारी देने से दूरी बनाई है।
क्या आक्रामक राजनीति BSP की रणनीति से अलग है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश की सोशल मीडिया सक्रियता, विपक्षी नेताओं पर सीधे हमले और आक्रामक राजनीतिक अंदाज BSP की पारंपरिक रणनीति से अलग पड़ रहे हैं? BSP में अंतिम राजनीतिक नियंत्रण हमेशा मायावती के हाथ में रहा है। ऐसे में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने और पार्टी की स्थापित राजनीतिक शैली के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर अब मायावती को ट्रोल करते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं कि दूसरी पार्टियां जहां युवा चेहरों को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं BSP अपने सबसे चर्चित युवा चेहरे को बार-बार पीछे क्यों कर रही है। फिलहाल इसका आधिकारिक जवाब मायावती के उस बयान में ही छिपा है, आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है।
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