Russia-Ukraine War: भारत ने चली ऐसी चाल, यूक्रेन बोला- यही प्रस्ताव सबसे असरदार

Published : Oct 05, 2026, 07:48 PM IST
Russia-Ukraine War: India’s Ceasefire Proposal Gets Ukraine’s Backing, But Russia Holds the Key

सार

Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। ऊर्जा ठिकानों और ब्लैक सी पर फोकस वाली पहल को यूक्रेन ने असरदार बताया है। अब रूस की सहमति अहम होगी।

रूस-यूक्रेन युद्ध को करीब पांच साल होने वाले हैं, लेकिन गोलियों के बीच शांति की तलाश अब भी जारी है। अमेरिका समेत कई देशों की कोशिशों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इसी बीच भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक पहल को आगे बढ़ाया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत के युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिका, तुर्की और मिस्र की पहलों के मुकाबले ज्यादा असरदार बताया है। अब नजर इस बात पर है कि मॉस्को इस पहल को कितनी गंभीरता से लेता है।

भारत के प्रस्ताव में आखिर क्या है?

भारत की पहल को दो चरणों में समझा जा सकता है। पहले ऐसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश है, जिन पर तत्काल कदम संभव हो। इनमें ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकना, नागरिकों को निशाना न बनाना और ब्लैक सी में सामान्य गतिविधियां बहाल करना शामिल है। इसके बाद स्थायी शांति के कठिन मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने का रास्ता बनाया जा सकता है।

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पहले छोटे कदम, फिर बड़ी शांति

भारत की रणनीति का अहम पहलू यही है कि सीधे सबसे मुश्किल विवादों पर जाने के बजाय पहले तनाव कम करने वाले कदम उठाए जाएं। ऊर्जा ढांचे पर हमले रुकने और ब्लैक सी में सुरक्षित गतिविधियां शुरू होने से दोनों देशों के बीच भरोसा बनाने की गुंजाइश बढ़ सकती है। इसके बाद सीमा, कब्जे वाले इलाकों और सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा संभव होगी।

अमेरिका, तुर्की और मिस्र से कैसे अलग?

अमेरिका का जोर रूस और यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर रहा है, जबकि तुर्की और मिस्र की पहल में ब्लैक सी के रास्ते अनाज और कृषि उत्पादों की आवाजाही बहाल करना अहम रहा है। भारत का प्रस्ताव इन मुद्दों को एक व्यापक प्रक्रिया में जोड़ता दिखता है। यही वजह है कि यूक्रेन ने इसे व्यावहारिक और असरदार बताया है।

ब्लैक सी पर भारत का दांव क्यों अहम?

ब्लैक सी यूक्रेन के व्यापार और अनाज निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सुरक्षित समुद्री गतिविधियां बहाल होने से व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई को राहत मिल सकती है। भारत के प्रस्ताव में इस पहलू को शामिल करना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल- रूस क्या करेगा?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूक्रेन यात्रा के दौरान जेलेंस्की और एंड्री सिबिहा के साथ शांति और ब्लैक सी जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। भारत लगातार संवाद के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है और रूस के साथ भी उसके कूटनीतिक संबंध हैं। हालांकि, प्रस्ताव की सफलता आखिरकार रूस और यूक्रेन दोनों की सहमति पर निर्भर करेगी। सीमा, कब्जे वाले क्षेत्र और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दे अब भी बेहद पेचीदा हैं। अगर शुरुआती कदमों पर सहमति बनती है, तो भारत की पहल बड़ी शांति वार्ता का दरवाजा खोल सकती है।

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