IPS संजुक्ता के नाम से कांपते हैं अपराधी, अब आयरन ले बनीं कोबरा कमांडो फोर्स की पहली महिला IG

Published : Sep 16, 2026, 01:51 PM IST

नई दिल्ली: आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने इतिहास रच दिया है। 'असम की आयरन लेडी' के नाम से मशहूर संजुक्ता अब सीआरपीएफ की स्पेशल जंगल वॉरफेयर कमांडो यूनिट 'कोबरा' (CoBRA) की पहली महिला महानिरीक्षक (IG) बन गई हैं।

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बड़े ऑपरेशन को लीड कर चुकी हैं संजुक्ता
  • संजुक्ता 2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की आईपीएस अफसर हैं। उन्होंने इसी महीने की शुरुआत में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) जॉइन किया था। पिछले हफ्ते ही उन्हें इस एलीट कोबरा यूनिट की कमान सौंपी गई है।
  • साल 2013-14 में संजुक्ता सोनितपुर में पुलिस अधीक्षक (SP) थीं। उस दौरान उन्होंने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशनों को लीड किया था। इसी के बाद से उन्हें 'आयरन लेडी' कहा जाने लगा।
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कौन हैं IPS संजुक्ता
  • असम की रहने वाली संजुक्ता ने स्टेट पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) में भी काम किया है। एनआईए में उन्होंने आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच की थी। कोबरा की आईजी बनने से ठीक पहले, वह असम पुलिस के सीआईडी (CID) विभाग की प्रमुख थीं।
  • पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी भी की।
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सजुक्ता ने संभाली कोबरा की कमान

संजुक्ता ने ऐसे समय में कोबरा की कमान संभाली है, जब यह फोर्स छत्तीसगढ़ और झारखंड के नक्सल प्रभावित जंगलों में सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही है। इन इलाकों में उग्रवाद विरोधी अभियानों में कोबरा का बड़ा रोल रहा है। इसके अलावा, जातीय हिंसा का सामना कर रहे मणिपुर में भी कोबरा की दो बटालियन तैनात हैं।

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क्या काम करती है कोबरा फोर्स

संजुक्ता की कोबरा फोर्स खास तौर पर गुरिल्ला और जंगल वॉरफेयर की ट्रेनिंग दी जाती है। घने जंगलों में लंबी दूरी तक पैदल गश्त करना, मुश्किल रास्तों से गुजरना, घात लगाकर हमला करना और जवाबी कार्रवाई करना इनकी खासियत है। इसके अलावा, आईईडी (IED) के खतरों से निपटना और खुफिया जानकारी के आधार पर सटीक ऑपरेशन करना भी इनके काम का अहम हिस्सा है।

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संजुक्ता को क्यों कहते आयरन लेडी ऑफ असम

संजुक्ता पराशर को डिपार्टमेंट में लेडी सिंघम के नाम से भी जाना जाता है। संजुक्ता ने बोडो उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में प्रमुख भूमिका निभाई थी। असम के जंगलों में उन्होंने एके-47 लिए सीआरपीएफ के जवानों और कमांडो को लीड किया था। उन्होंने वहां 15 महीनों में करीब 16 एनकाउंटर किए थे।

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कई पुरस्कारों से सम्मानित हैं संजुक्ता

संजुक्ता ने 2006 में सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक आई थी। उसके बाद उन्होंने मेघालय-असम कैडर का सिलेक्शन किया था। 2008 में उनकी पहली पोस्टिंग माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में हुई थी। उदालगुरी में बोडो और बांग्लादेशियों की हिंसा को उन्होंने कंट्रोल किया था जिसके बाद तारीफ हुई। उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें कुछ सालों पहले केन्द्रीय गृहमंत्री पदक से सम्मानित किया गया था।

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