SIR क्या है? वोटर लिस्ट से नाम हटने से लेकर चुनाव आयोग के अंदर विवाद तक, समझिए पूरी कहानी

Published : Sep 25, 2026, 12:44 PM IST
Election Commission SIR

सार

Election Commission SIR: SIR क्या है और वोटर लिस्ट, Form-6, ERO व सॉफ्टवेयर को लेकर विवाद क्यों हुआ? चुनाव आयोग के अंदर उठी आपत्तियों तक जानिए बिहार से शुरू हुई प्रक्रिया की पूरी कहानी।

SIR Controversy: वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अब सिर्फ मतदाता सूची की जांच की प्रक्रिया नहीं रह गई है। इसके तरीके, वोटरों के नाम हटाने, नए वोटरों के Form-6, वोटर डेटाबेस और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के अलग-अलग कदमों पर कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। जानिए SIR की शुरुआत से लेकर चुनाव आयोग के अंदर उठी आपत्तियों तक पूरी डिटेल।

SIR की शुरुआत कहां से हुई?

SIR की मौजूदा प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई। इसका मकसद वोटर लिस्ट की गहन जांच और उसमें मौजूद गलत, डुप्लीकेट, मृत या दूसरी वजहों से अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना और पात्र लोगों के नाम सुनिश्चित करना है। अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्राफ्ट रोल में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।

फिर विवाद Form-6 तक कैसे पहुंचा?

नए वोटर का नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़ा नया सवाल जोड़ा गया। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई और कहा कि वैधानिक Form-6 में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन जरूरी था।

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ERO और सॉफ्टवेयर का विवाद क्या है?

ERO यानी Electoral Registration Officer जमीन पर वोटर की पात्रता की जांच करने वाला वैधानिक अधिकारी होता है। विवाद का एक हिस्सा इस बात से जुड़ा है कि वोटर डेटाबेस और ECINet जैसे केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर सिस्टम में स्थानीय अधिकारियों के फैसले किस तरह दर्ज होते हैं। संधू और जोशी ने डेटाबेस के केंद्रीकरण और अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए।

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गोवा और वेस्ट बंगाल में क्या हुआ?

  • गोवा में 97 वोटरों को स्थानीय अधिकारियों ने दस्तावेजों के आधार पर पात्र पाया, लेकिन उस समय सॉफ्टवेयर में उनके नाम बहाल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस विकल्प को लेकर कई बार पत्र भी भेजे।
  • वहीं वेस्ट बंगाल में SIR के दौरान 27.16 लाख वोटरों के नाम हटाए गए। इनमें से 22.21 लाख से ज्यादा ने नाम वापस जोड़ने के लिए अपील की। कुल अपीलों की संख्या 38.31 लाख बताई गई है।
  • यानी SIR की पूरी चेन को समझें तो मामला वोटर लिस्ट की जांच, नाम हटना या जुड़ना, Form-6, ERO की भूमिका, केंद्रीकृत डेटाबेस और सॉफ्टवेयर, गोवा और वेस्ट बंगाल के मामले, चुनाव आयोग के अंदर उठी आपत्तियों तक पहुंचता है। यही वजह है कि SIR अब चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी एक बड़ी राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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