
जहां एक ओर श्री सोमनाथ मंदिर को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह पवित्र धाम अब नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का भी सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की सामाजिक सोच और जनकल्याणकारी नीतियों ने सैकड़ों महिलाओं के जीवन को नई दिशा दी है।
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट में वर्तमान में कुल 906 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें से 262 महिलाएं विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। यह भागीदारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को समान अवसर देने और उन्हें नेतृत्व में आगे बढ़ाने की ट्रस्ट की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंदिर परिसर स्थित पवित्र बिल्व वन का संचालन पूरी तरह नारी शक्ति के हाथों में है। यहां कार्यरत 16 महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और स्वच्छता की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संतुलन का उदाहरण है, बल्कि महिलाओं की कार्यकुशलता और समर्पण को भी रेखांकित करती है।
सोमनाथ मंदिर में प्रसाद वितरण जैसे आस्था से जुड़े कार्य में 65 महिलाएं सेवाएं दे रही हैं। वहीं, मंदिर के भोजनालय में 30 महिलाएं हजारों श्रद्धालुओं को सेवा भाव से भोजन परोसती हैं। ये महिलाएं मंदिर की सेवा परंपरा को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से कुल 363 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। इन महिलाओं की संयुक्त वार्षिक आय लगभग 9 करोड़ रुपये है, जो उनके आर्थिक स्वावलंबन और जीवन स्तर में आए सकारात्मक बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह आय न केवल उनके परिवारों को सशक्त बना रही है, बल्कि समाज के व्यापक विकास में भी योगदान दे रही है।
इस प्रकार श्री सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने आध्यात्मिक विरासत को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए महिला सशक्तिकरण का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। आस्था के इस पावन केंद्र से आज आत्मविश्वास, स्वाभिमान और स्वावलंबन की प्रेरणादायी सुगंध पूरे समाज में फैल रही है।
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