VIDEO: जंतर-मंतर पर भारी बवाल! भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक को क्यों ले गई दिल्ली पुलिस?

Published : Jul 18, 2026, 10:00 AM IST
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सार

जंतर-मंतर पर आधी रात का हाई-वोल्टेज ड्रामा! 21वें दिन सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन क्यों हटाया गया? पत्नी की खुली चेतावनी के बाद सफदरजंग अस्पताल में बढ़ा सस्पेंस। क्या 20 जुलाई को मचेगा बड़ा सियासी घमासान?

नई दिल्ली: देश की राजधानी का सबसे बड़ा विरोध स्थल, जंतर-मंतर शनिवार की सुबह अचानक एक छावनी में तब्दील हो गया। पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने एक बड़े और गोपनीय ऑपरेशन के तहत वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुँचा दिया है। NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी, लेकिन उन्हें हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर चीख-पुकार, नारेबाजी और भारी अफरातफरी का माहौल बन गया है।

 

 

सुबह-सुबह जंतर-मंतर पर क्या हुआ?

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पहुंची, जहां सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। मेडिकल टीम की सलाह और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई। जैसे ही पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई, वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया। कुछ लोगों ने पुलिस पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने दावा किया कि पूरी कार्रवाई संयम और कानून के दायरे में रहकर की गई।

 

 

हाईकोर्ट का वो 'सीक्रेट' आदेश और दिल्ली पुलिस का एक्शन प्लान

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट का एक बेहद महत्वपूर्ण दखल माना जा रहा है। दो दिन पहले ही, अदालत ने वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि "किसी भी नागरिक का जीवन कीमती है।" कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट की रोज़ाना क्लिनिकल जाँच की जाए और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल मदद दी जाए। डॉक्टरों द्वारा जारी आखिरी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, लगातार उपवास के कारण वांगचुक का वज़न 8 किलोग्राम से ज़्यादा कम हो चुका था और उनके अंग धीरे-धीरे जवाब दे रहे थे। दिल्ली पुलिस के DCP ने 'X' पर पोस्ट कर साफ़ किया कि यह कार्रवाई माननीय हाईकोर्ट के आदेशों और एक्सपर्ट मेडिकल सलाह के तहत ही की गई है, ताकि वांगचुक की जान बचाई जा सके।

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'कॉकरोच जनता पार्टी' का उग्र विरोध: धर्मेंद्र प्रधान से अब सीधे PM मोदी पर निशाना!

जैसे ही पुलिस शनिवार सुबह वांगचुक को एम्बुलेंस में ले जाने लगी, वहां मौजूद 'कॉकरोच जनता पार्टी' के कार्यकर्ताओं ने पुलिस का रास्ता रोकने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत डिपके ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। डिपके ने कहा, "अगर सरकार को लगता है कि वांगचुक को हटाने से यह आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो वे भारी गलतफहमी में हैं। अब तक हम सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, लेकिन इस शर्मनाक हरकत के बाद अब हम सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे!"

 

 

अस्पताल के कमरा नंबर 66 का सस्पेंस: पत्नी गीतांजलि की खुली चेतावनी

सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद असली सस्पेंस और विवाद तब शुरू हुआ, जब उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोशल मीडिया पर एक बेहद गंभीर पोस्ट साझा किया। गीतांजलि ने डॉक्टरों और प्रशासन को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन उनकी या उनके परिवार की मर्जी के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या ड्रिप न दे। उन्होंने लिखा, "मैं सफदरजंग अस्पताल में उनके साथ हूँ। हमारी और उन डॉक्टरों की सहमति के बिना, जो पिछले 20 दिनों से सोनम की सेहत की निगरानी कर रहे थे, उन्हें मुँह से या नसों (IV) के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए।" इस बयान के बाद यह आशंका गहरा गई है कि क्या वांगचुक अस्पताल के भीतर भी किसी तरह के इलाज को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं?

 

 

20 जुलाई का 'महामार्च': क्या संसद का मॉनसून सत्र घेरेगा विपक्ष?

वांगचुक के इस आंदोलन को दबाने की कोशिशों ने अब विपक्षी खेमे को भी पूरी तरह से लामबंद कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने विरोध स्थल पर जाकर वांगचुक का समर्थन किया था।

अब प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। मॉनसून सत्र के पहले दिन, यानी सोमवार 20 जुलाई को हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन तक 'महामार्च' करने का खुला ऐलान किया है। पुलिस ने भले ही जंतर-मंतर को खाली करा लिया हो, लेकिन इस आंदोलन की आग अब दिल्ली की सड़कों से लेकर संसद के भीतर तक सुलगने के लिए तैयार है। आने वाले 48 घंटे देश की राजनीति के लिए बेहद विस्फोटक साबित हो सकते हैं।

 

 

अब आगे क्या होगा?

सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि उनके समर्थक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक स्थल खाली करने की अपील की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अस्पताल में वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति कैसी रहती है, क्या उनका अनशन औपचारिक रूप से समाप्त होगा और क्या 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार हो पाएगा। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में देश की राजनीति और इस आंदोलन, दोनों की दिशा तय कर सकते हैं।

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