महाराष्ट्र में महा-विलय का गुप्त प्लान! क्या शरद पवार और अजित गुट फिर एक होंगे? बीजेपी की इस नई शर्त और मॉनसून सत्र के पीछे छिपा है कौन सा बड़ा सियासी राज? जानिए अंदर की कहानी।
नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। परदे के पीछे चल रही शह और मात के खेल के बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक ऐसी चाल चली है जिसने पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरण को हिला कर रख दिया है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट की नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में एंट्री तभी मुमकिन हो पाएगी, जब पहले NCP के दोनों धड़े आपस में विलय करेंगे। यह चौंकाने वाला घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है और महाराष्ट्र के दोनों धड़ों के नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर अचानक तेज़ हो गया है।
BJP का नया फॉर्मूला, क्या बदल जाएगी महाराष्ट्र की राजनीति?
सूत्रों के मुताबिक, BJP फिलहाल शरद पवार गुट को अलग राजनीतिक इकाई के रूप में NDA में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी की प्राथमिकता यह है कि पहले अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाले दोनों गुट अपने मतभेद समाप्त करें और एक पार्टी के रूप में सामने आएं। इसके बाद ही भविष्य में किसी राजनीतिक साझेदारी पर विचार किया जा सकता है। यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र में दोनों गुटों के बीच संभावित मेल-मिलाप की चर्चाएं लगातार तेज़ हो रही हैं।
जुलाई 2023 का वो ज़ख्म: क्या फिर एकजुट होंगी दो विरोधी धाराएं?
जुलाई 2023 में महाराष्ट्र की राजनीति ने सबसे बड़ा यू-टर्न देखा था, जब अजित पवार अपने कई दिग्गज सहयोगियों के साथ शरद पवार से बगावत कर महाराष्ट्र की BJP-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को ही असली NCP माना और पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न उन्हें सौंप दिया। इसके जवाब में, बुजुर्ग राजनेता शरद पवार ने अपनी नई पार्टी 'नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)' यानी NCP(SP) बनाई।
पिछले कई महीनों से दोनों गुट एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं, लेकिन अब परदे के पीछे से आ रही खबरें बताती हैं कि बीजेपी व्यक्तिगत तौर पर शरद पवार या उनके सहयोगियों को गठबंधन में शामिल नहीं करना चाहती। बीजेपी का सीधा और कड़ा रुख है-"पहले अपने आपसी मतभेद सुलझाओ, आपस में विलय करो और एक इकाई बनकर सामने आओ, तभी एनडीए के दरवाजे खुलेंगे।"
मॉनसून सत्र का सस्पेंस: '850 लोकसभा सीटों' का वो जादुई आंकड़ा!
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस नई अटकलबाजी और जल्दबाजी के पीछे एक बहुत बड़ा संसदीय गणित छिपा है। दरअसल, सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) बिल पेश करने की तैयारी में है। इस ऐतिहासिक बिल का मुख्य मकसद लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा संख्या से बढ़ाकर सीधे 850 करना और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करना है। इस महत्वपूर्ण मोड़ पर लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 1 सीट रखने वाली NCP(SP) की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। हालांकि, शरद पवार की बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि यदि परिसीमन में सभी राज्यों की सीटें समान रूप से 50% बढ़ती हैं, तो विरोध की कोई वजह नहीं होगी। लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि अंतिम फैसला विपक्षी 'INDIA' गठबंधन की बैठक के बाद ही लिया जाएगा।

आधी रात की गुप्त बैठकें और दावों का 'हाई-वोल्टेज' ड्रामा
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में तब हलचल और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर बुधवार देर रात दोनों गुटों के नेताओं की मौजूदगी देखी गई। हालांकि, NCP(SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने किसी भी राजनीतिक खिचड़ी पकने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पाटिल ने स्पष्ट किया कि वे केवल सांगली ज़िले के स्थानीय प्रशासनिक मामलों को लेकर मुख्यमंत्री से मिले थे। उन्होंने एक और सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि अजित पवार के गुट के साथ विलय की सारी बातें इस साल की शुरुआत में एक दर्दनाक हवाई दुर्घटना में अजित पवार की असामयिक मृत्यु के बाद ही खत्म हो गई थीं। इसके बावजूद, खुद शरद पवार द्वारा हाल ही में सीएम एकनाथ शिंदे के दफ्तर में अपने विधायकों के साथ बैठक करने को लेकर सस्पेंस बरकरार है।
दिल्ली दरबार में कैबिनेट विस्तार की मांग और आगे का सस्पेंस
इस पूरे ड्रामे के बीच, अजित पवार गुट की राज्य इकाई के अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके कार्यकर्ताओं ने एक नई मांग उठाकर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। पार्टी के प्रवक्ता उमेश पाटिल ने खुलकर अपनी इच्छा जाहिर की है कि अप्रैल में राज्यसभा सांसद बने पार्थ पवार को आगामी केंद्रीय कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद दिया जाना चाहिए।
अफवाह या नई राजनीतिक पटकथा?
फिलहाल BJP, NCP और विपक्षी गठबंधन की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक समझौता सामने नहीं आया है। अधिकांश नेता सार्वजनिक रूप से गठबंधन या विलय की अटकलों को खारिज कर रहे हैं।फिर भी लगातार हो रही मुलाकातें, संसदीय गणित और बदलते राजनीतिक समीकरण यह संकेत दे रहे हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में पर्दे के पीछे कई संभावनाओं पर मंथन जारी है। अब देखना यह है कि क्या शरद पवार का गुट राष्ट्रीय स्तर पर इस चक्रव्यूह को स्वीकार कर अपनी विरोधी धारा में विलय करेगा, या फिर मॉनसून सत्र के दौरान 'INDIA' गठबंधन के साथ खड़ा रहकर बीजेपी के इस 'मास्टर प्लान' को ध्वस्त कर देगा? महाराष्ट्र की जनता और देश की नजरें अब "इंतज़ार करो और देखो" के मोड़ पर टिकी हुई हैं।


