Nile River Tragedy: दुनिया की सबसे लंबी नील नदी में नाव पलटी, 15 की मौत, कई अब भी लापता

Published : Feb 12, 2026, 10:23 AM IST

Sudan Boat Accident: नील नदी में पलटी यात्रियों से भरी नाव-महिलाओं और बच्चों समेत 15 की मौत, 6 लोग अब भी लापता। ओवरलोडिंग या लापरवाही? दुनिया की सबसे लंबी नदी पर उठे सुरक्षा और सिस्टम पर गंभीर सवाल।

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Nile River Tragedy: सूडान की नील नदी एक बार फिर दर्दनाक हादसे की गवाह बनी है। यात्रियों से भरी एक नाव अचानक पलट गई और देखते ही देखते खुशियों से भरा सफर मातम में बदल गया। इस हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

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हादसा कैसे हुआ और नाव में कितने लोग थे?

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दुर्घटना सूडान के उत्तरी नील नदी प्रांत में हुई। नाव में करीब 27 लोग सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। अचानक नाव असंतुलित हुई और कुछ ही पलों में नदी में समा गई। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तेज़ बहाव के कारण कई यात्री डूब गए।

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रेस्क्यू ऑपरेशन में क्या अब भी उम्मीद बाकी है?

‘सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क’ के अनुसार, अब तक 15 शव बरामद किए जा चुके हैं और छह लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हालांकि, कम से कम छह लोग अब भी लापता हैं। स्थानीय लोग और बचाव दल लगातार तलाश में जुटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि समय पर आधुनिक रेस्क्यू उपकरण होते तो और जानें बच सकती थीं।

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 क्या ओवरलोडिंग बनी इस त्रासदी की सबसे बड़ी वजह?

सूडान में नदी परिवहन आम है, लेकिन सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी उतनी ही आम है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि नाव जरूरत से ज्यादा भरी हुई थी। ओवरलोडिंग, लाइफ जैकेट की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरी-ये सभी कारण इस हादसे को और भयावह बना सकते हैं।

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नील नदी: जीवनदायिनी या खतरे की नदी?

नील नदी दुनिया की सबसे लंबी नदी मानी जाती है, जिसकी लंबाई करीब 6,650 किलोमीटर है। यह नदी अफ्रीका के कई देशों से होकर बहती है और आखिर में भूमध्य सागर में मिलती है। इतिहास में इसे “मिस्र का वरदान” कहा गया, लेकिन आज यही नदी लापरवाही के चलते मौत का कारण बनती जा रही है।

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क्या सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी तय होगी?

स्थानीय डॉक्टरों के समूह ने सरकार से मांग की है कि नदी सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और बचाव कार्यों को तेज़ किया जाए। अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे। 

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आखिर कब सुरक्षित होगा नदी का सफर?

यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि चेतावनी है। चेतावनी उन सिस्टमों के लिए, जो सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते। जब तक नियम, निगरानी और ज़िम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक नील नदी जैसी जीवनरेखा बार-बार मातम का कारण बनती रहेगी।

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