एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अपनी जासूसी के लिए मशहूर इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को ट्रैक करने के लिए राजधानी तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को ही हैक कर लिया था।

वॉशिंगटन: दुश्मनों पर हमला करने और जासूसी के लिए दुनिया में मशहूर इजरायल को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि उसने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पता लगाने के लिए राजधानी तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को ही हैक कर लिया था। यह खबर ठीक तब सामने आई है, जब पता चला था कि पिछले शनिवार को हुए हमले से पहले इजरायल ने 'बड़ा साब' नाम का एक मोबाइल ऐप हैक करके शिया मुस्लिमों को सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश की थी। अब एक अखबार ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के अधिकारियों के हवाले से यह सनसनीखेज रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोसाद ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को एक साल से हैक कर रखा था और खामेनेई के बॉडीगार्ड्स और बड़े अधिकारियों की हर हरकत पर नजर रख रहा था।

उल्टा पड़ गया दांव

ईरान की सरकार ने अपने विरोधियों और प्रदर्शनकारियों को पहचानने और उन्हें दबाने के लिए पूरे देश में निगरानी कैमरे लगवाए थे। हाल में हुए प्रदर्शनों को कुचलने के लिए इन्हीं कैमरों का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन यही दांव उल्टा पड़ गया और इजरायल ने इन्हीं कैमरों का इस्तेमाल ईरान के बड़े अधिकारियों पर नजर रखने के लिए कर लिया।

इजरायल ने पिछले साल ही इन कैमरों पर कंट्रोल हासिल कर लिया था। इनमें से एक कैमरा उस जगह लगा था, जहां खामेनेई की सिक्योरिटी टीम अपनी गाड़ियां पार्क करती थी। इस कैमरे के जरिए मोसाद पिछले एक साल से खामेनेई के सुरक्षाकर्मियों, उनकी बैकग्राउंड और उन्हें दी गई जिम्मेदारियों जैसी जानकारी चुपके से इकट्ठा कर रहा था। उनकी रणनीति यह थी कि अगर ऑफिस के पास सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं, तो इसका मतलब है कि खामेनेई भी वहीं हैं।

हमले वाले दिन, यानी शनिवार को, इजरायल और अमेरिका ने तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट पर मोबाइल नेटवर्क जाम कर दिया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हमले की जरा सी भी भनक लीक होने पर खामेनेई के बॉडीगार्ड्स तक कोई जानकारी न पहुंच पाए। कहा जा रहा है कि ईरानी नेताओं की रोज की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को AI टूल्स और एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके परखा गया और फिर हमले की पूरी योजना तैयार की गई।

क्या दांत और पेट में चिप लगाई गई थी?

ट्रैफिक कैमरा हैकिंग की खबर के बाद सोशल मीडिया पर एक और कहानी खूब चल रही है। इसके मुताबिक, खामेनेई के ठिकाने का पता लगाने के लिए एक ईरानी सैन्य अधिकारी के दांत और पेट में चिप लगाई गई थी। कहा जा रहा है कि कुछ साल पहले मोसाद के एजेंट डॉक्टर और डेंटिस्ट बनकर ईरान में घुसे थे। एक डेंटिस्ट ने ईरान के एक बड़े सैन्य अधिकारी के दांत में चिप लगा दी थी। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि मोसाद के गैस्ट्रो डॉक्टरों ने एक सैन्य अधिकारी के पेट में ऐसी ही चिप लगाई थी, जिसके जरिए खामेनेई और उनके परिवार के छिपने की जगह का पता लगाया गया।

क्या ईरान के कमांडर कानी अमेरिका-इजरायल के जासूस हैं?

अब कुछ लोग ईरान के IRGC कमांडर इस्माइल कानी पर भी गंभीर आरोप लगा रहे हैं। कुछ लोगों का तर्क है कि वह मोसाद और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के एजेंट हैं। वे अपने तर्क के पीछे वजह दे रहे हैं कि कानी इजरायली हमले में बाल-बाल बच गए और हमले से कुछ मिनट पहले ही खामेनेई के घर से निकले थे। कुछ खबरों के मुताबिक, कानी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। हालांकि, इन कहानियों की अब तक किसी ने पुष्टि नहीं की है।

इजरायल ने क्या-क्या किया?

1. ईरान ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए देशभर में ट्रैफिक कैमरों का जाल बिछाया।

2. इजरायल ने इन्हीं कैमरों को हैक कर लिया। एक कैमरा तो खामेनेई के सुरक्षाकर्मियों की पार्किंग में लगा था।

3. इसके जरिए खामेनेई की सिक्योरिटी टीम में कौन-कौन है, उनका बैकग्राउंड क्या है, जैसी सारी जानकारी जुटाई।

4. रणनीति थी- ज्यादा सुरक्षाकर्मी मतलब खामेनेई मौजूद हैं, कम हैं तो मतलब वह वहां नहीं हैं।

5. पिछले शनिवार हमले से ठीक पहले, खामेनेई के दफ्तर के आसपास का मोबाइल नेटवर्क जाम कर दिया गया ताकि कोई खबर लीक न हो।