
केरल के सबरीमाला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस बहुचर्चित मामले में जहां महिलाओं के प्रवेश, धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अधिकारों पर गंभीर बहस चल रही है, वहीं सुनवाई के दौरान एक वकील को मुद्दे से भटकने पर अदालत की नाराजगी भी झेलनी पड़ी।
नौ जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बहस केवल विचाराधीन मुद्दों तक सीमित रहनी चाहिए। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई, जब एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने सबरीमाला विवाद से इतर कई व्यापक सामाजिक और वैचारिक तर्क रखने शुरू कर दिए।
सबरीमाला मंदिर मामले में 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री पर अपनी दलील रखते हुए कहा कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी प्रतिबंधित है, इसलिए धार्मिक परंपराओं और आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। यह मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश और समानता के अधिकार से जुड़ा संवैधानिक प्रश्न बन चुका है। इसी वजह से यह सुनवाई कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर से DA तक, कैसे तय होती है सरकारी कर्मचारियों की सैलरी
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने तर्क दिया कि धर्म, पंथ से श्रेष्ठ है और सांप्रदायिक संघर्षों का इतिहास देश के विभाजन से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 2000 वर्षों में सांप्रदायिक संघर्षों के कारण भारत कई हिस्सों में बंटा। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को अपने फैसलों के दीर्घकालिक सामाजिक परिणामों पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, अनुच्छेद 25 और 26 अत्यंत सीमित तरीके से लिखे गए हैं और धार्मिक स्वतंत्रता की व्याख्या व्यापक दृष्टि से होनी चाहिए। हालांकि अदालत ने बार-बार उन्हें मुख्य विषय पर लौटने को कहा।
अपनी दलीलों के दौरान उपाध्याय ने संस्कृत भाषा, संविधान की शब्दावली और B. R. Ambedkar का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि संस्कृत में अंग्रेजी से अधिक अक्षर हैं और अंग्रेजी में “संविधान” या “धर्म” जैसे शब्दों का सटीक अनुवाद संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संस्कृत को राजभाषा बनाने के लिए विधेयक पेश किया था। इसके साथ ही उन्होंने प्राथमिक शिक्षा में धर्म को शामिल करने संबंधी अपनी जनहित याचिका का भी उल्लेख किया।
जब बहस लगातार मूल मुद्दे से दूर जाती दिखी, तब न्यायमूर्ति महादेवन ने स्पष्ट रूप से हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, “आप हम सभी के द्वारा चर्चा किए जा रहे विषय से भटक रहे हैं। आपने कहा कि संस्कृत में 52 अक्षर हैं; उसी प्रकार तमिल में 247 अक्षर हैं। इन सब विषयों में न जाएं। मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित करें।” अदालत की यह टिप्पणी साफ संकेत थी कि संवैधानिक पीठ केवल संबंधित कानूनी प्रश्नों पर केंद्रित रहना चाहती है। एक तरह से कोर्ट ने वकील को स्पष्ट फटकार लगाते हुए बहस को सीमित रखने का निर्देश दिया।
सबरीमाला मामला वर्षों से धार्मिक आस्था बनाम समानता के अधिकार की बहस का केंद्र रहा है। एक ओर मंदिर की परंपरा और धार्मिक मान्यताओं की बात है, तो दूसरी ओर महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न। सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई आने वाले समय में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों में भी महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस मामले पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।
यह भी पढ़ें: स्वास्थ्य विभाग भी हैरान! 3,000 गर्भवती महिलाएं गायब! क्या कर्नाटक के यादगिरि में हुआ बड़ा खेल?
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।