8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर से DA तक, कैसे तय होती है सरकारी कर्मचारियों की सैलरी

Published : Apr 28, 2026, 03:13 PM IST
8th Pay Commission Teachers and Postmen Demand Big Salary Hike Know How New Pay Will Be Decided

सार

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर शिक्षकों और पोस्टमैन ने बड़ी सैलरी बढ़ोतरी की मांग रखी है। शिक्षकों ने 1.34 लाख और पोस्टमैन ने 1.12 लाख बेसिक सैलरी की मांग की है। जानिए फिटमेंट फैक्टर, DA, HRA और नई सैलरी कैसे तय होगी।

केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच नई उम्मीदें और कई सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है,इस बार तनख्वाह कितनी बढ़ेगी?

सरकारी कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखनी शुरू कर दी हैं। कहीं बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग है, तो कहीं फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट और भत्तों में बड़े बदलाव की बात हो रही है। खासतौर पर शिक्षकों और डाक विभाग के कर्मचारियों की मांगों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब हर कर्मचारी यह समझना चाहता है कि आखिर सरकार वेतन बढ़ाने का फैसला किन आधारों पर करती है और 8वें वेतन आयोग में किस तरह का बदलाव संभव है।

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शिक्षकों की मांग: बेसिक सैलरी 1.34 लाख रुपये तक हो

8वें वेतन आयोग को लेकर शिक्षकों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग एंट्री लेवल के शिक्षकों यानी लेवल-6 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 1,34,500 रुपये प्रति माह करने की है। इसके साथ ही लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 50,000 से 60,000 रुपये के बीच तय करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। मौजूदा वेतन व्यवस्था की तुलना में यह काफी बड़ा बदलाव माना जा रहा है। शिक्षकों की मांग सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने भत्तों, इंश्योरेंस कवर और सालाना वेतन वृद्धि में भी संशोधन की मांग की है।

फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर

सैलरी बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की होती है। यही वह आधार है जिससे नई बेसिक सैलरी तय होती है। शिक्षकों ने मांग की है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 2.62 से 3.83 के बीच किया जाए। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की कुल सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि हर साल आय में बेहतर बढ़ोतरी हो सके।

पोस्टमैन और मेल गार्ड की भी बड़ी मांग

डाक विभाग से जुड़े संगठनों ने भी सरकार को मेमोरेंडम सौंपकर वेतन वृद्धि की मांग की है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) ने एंट्री लेवल यानी लेवल-1 कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये करने की मांग की है, जबकि वर्तमान में यह 18,000 रुपये है।

सबसे बड़ी मांग पोस्टमैन और मेल गार्ड (लेवल-5) के लिए रखी गई है, जहां मौजूदा 25,500 रुपये बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 1.12 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह बढ़ोतरी कर्मचारियों की अपेक्षाओं और महंगाई के दबाव को दर्शाती है।

FNPO की मांग: 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू हो

FNPO ने सभी कर्मचारियों के लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। चूंकि इसी फैक्टर के आधार पर नई सैलरी और पेंशन तय होती है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों कर्मचारियों की आय पर पड़ेगा। संगठन ने यह भी कहा है कि मौजूदा 3 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट आज की महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। शहरों में बढ़ते किराए, स्वास्थ्य खर्च और बच्चों की शिक्षा जैसी जरूरतों को देखते हुए 6 प्रतिशत तक इंक्रीमेंट जरूरी है।

सरकार किस आधार पर बढ़ाती है सैलरी?

अब सवाल यह है कि सरकार आखिर वेतन वृद्धि तय कैसे करती है? केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी तय करने के लिए वेतन आयोग कई तकनीकी और आर्थिक कारकों को ध्यान में रखता है। सबसे पहले मौजूदा बेसिक पे को एक तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है, जिससे नया बेसिक पे निकलता है। इसके बाद उसमें महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे भत्ते जोड़े जाते हैं। यानी केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि पूरी पे स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर अंतिम वेतन तय किया जाता है।

ये फैक्टर्स तय करते हैं आपकी नई सैलरी

  1. फिटमेंट फैक्टर : यह एक गुणांक होता है, जिसे मौजूदा बेसिक पे पर लागू करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। यही सबसे बड़ा निर्णायक तत्व होता है।
  2. पे मैट्रिक्स: 7वें वेतन आयोग में पुराने पे बैंड और ग्रेड पे की जगह पे मैट्रिक्स सिस्टम लाया गया था। इसमें लेवल 1 से लेवल 18 तक वेतन संरचना तय होती है।
  3. भत्ते: बेसिक सैलरी के अलावा महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) भी कुल वेतन को प्रभावित करते हैं।

कर्मचारियों की नजर अब सरकार के फैसले पर

8वें वेतन आयोग को लेकर अभी अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं, लेकिन कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। शिक्षक हों, पोस्टमैन हों या अन्य केंद्रीय कर्मचारी,हर वर्ग बेहतर वेतन, मजबूत सामाजिक सुरक्षा और महंगाई के अनुसार आय में सुधार चाहता है। अब सबकी नजर सरकार पर है कि वह इन मांगों पर कितना गंभीर रुख अपनाती है। स्पष्ट है कि 8वां वेतन आयोग केवल सैलरी बढ़ाने का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिरता और भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला बनने जा रहा है।

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