
Karnataka Female Foeticide News: कर्नाटक के यादगिरि जिले में कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ चल रही है। यहां स्वास्थ्य विभाग यह पता चलने के बाद खुद सदमे में है कि उसके पास रजिस्टर्ड 3,000 से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। जिले में 30,000 से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन इनमें से एक बड़ी संख्या की डिलीवरी का कोई अता-पता नहीं है। इस खुलासे के बाद पिछले साल (2024-25) में चोरी-छिपे एक हजार से ज़्यादा कन्या भ्रूण हत्याएं होने की आशंका गहरा गई है।
यह मामला पहली बार 18 मार्च को सामने आया, जब 'कन्नड़ प्रभा' अखबार ने 'यादगिरि जिले में 7 महीने में 30 कन्या भ्रूण हत्याएं' शीर्षक से एक स्पेशल रिपोर्ट छापी। इस रिपोर्ट ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए, स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव, हर्ष गुप्ता ने तुरंत जांच के आदेश दिए। उन्होंने मेडिकल अधिकारियों की पांच सदस्यों वाली एक राज्य-स्तरीय कमेटी बनाई और उन्हें न सिर्फ यादगिरि, बल्कि राज्य के सभी जिलों में गहन जांच करने को कहा।
कन्नड़ प्रभा की रिपोर्ट के बाद, स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने 25 मार्च की दोपहर को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की। इसी बैठक में यादगिरि के असल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। कन्नड़ प्रभा को मिली उस बैठक की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2025 तक के सात महीनों में विभाग में आधिकारिक तौर पर गर्भपात के 652 मामले दर्ज किए गए। जबकि राज्य में गर्भपात का औसत 5.24% है, यादगिरि का औसत 3.16% था।
साल 2024-25 के आंकड़े तो और भी ज़्यादा चिंताजनक हैं। कुल 31,435 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इनमें से 26,584 बच्चों का जन्म हुआ और 188 शिशुओं की मौत हो गई। 207 महिलाओं की डिलीवरी अभी होनी है और 1,329 मामलों को गर्भपात के रूप में दर्ज किया गया। लेकिन इन सबको जोड़ने पर कुल संख्या सिर्फ 28,308 होती है। इसका मतलब है कि 3,127 मामलों का कोई हिसाब ही नहीं है। क्या इन महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया? क्या बच्चे ज़िंदा हैं या उनकी मौत हो गई? इन सवालों का कोई जवाब नहीं है।
सूत्रों ने कन्नड़ प्रभा को बताया कि बैठक के दौरान, अधिकारियों ने इस बात की भी आशंका जताई कि इन लापता मामलों में से कई चोरी-छिपे कराए गए गर्भपात हो सकते हैं, जो इसलिए कराए गए क्योंकि गर्भ में लड़की थी। राज्य-स्तरीय कमेटी ने 6 अप्रैल से 10 अप्रैल तक जिले का दौरा कर जानकारी इकट्ठा की और कहा जा रहा है कि वे अपने निष्कर्षों से हैरान थे। विभाग के अंदर यह भी फुसफुसाहट है कि सिर्फ कागजों पर टारगेट पूरा करने के लिए फर्जी 'थायी कार्ड' (मातृत्व कार्ड) बनाए जा रहे हैं।
यादगिरि के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर हर्षल भोयर ने कहा, “राज्य-स्तरीय कमेटी ने जिले का दौरा कर जानकारी जुटाई है। उन्होंने हमें बताया है कि जल्द ही सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। मैंने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की है और फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और गर्भपात को रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं।”
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