SC vs NCERT विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT चेयरमैन को भेजा शो-कॉज नोटिस!

Published : Feb 26, 2026, 12:00 PM ISTUpdated : Feb 26, 2026, 01:24 PM IST

Breaking Insight: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT बेंच को ‘न्यायपालिका भ्रष्टाचार चैप्टर’ पर शो-कॉज नोटिस जारी किया। CJI सूर्यकांत ने कंटेम्प्ट कार्रवाई की चेतावनी दी। विवादित क्लास 8 टेक्स्टबुक और उसकी PDF सर्कुलेशन पर कोर्ट के सख्त रुख में है।

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Supreme Court notice NCERT: क्लास 8 की NCERT सोशल साइंस किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़ा एक चैप्टर इन दिनों बड़े विवाद का कारण बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए NCERT चेयरमैन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर छात्रों और शिक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि “ज्यूडिशियरी करप्ट है”, तो इसका गलत असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक मामला बंद नहीं किया जाएगा।

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क्या NCERT की किताब ने न्यायपालिका की छवि पर सवाल खड़े किए?

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि चैप्टर में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों (pendency) पर ज्यादा फोकस किया गया, जबकि न्याय तक पहुंच, कानूनी सहायता और सुधारों की जानकारी को उतनी जगह नहीं दी गई। कोर्ट ने इसे “पक्षपातपूर्ण कहानी” बताया और कहा कि इससे छात्रों के मन में गलत संदेश जा सकता है।

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क्या सरकार ने गलती मानी?

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और विवादित कंटेंट सामने आते ही कार्रवाई की गई। इस चैप्टर से जुड़े दो लोगों को भविष्य में किसी भी मंत्रालय की गतिविधियों से अलग कर दिया गया है।

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PDF सर्कुलेशन से क्यों बढ़ी चिंता?

सीनियर वकील Kapil Sibal ने कोर्ट को बताया कि किताब का PDF वर्जन बड़े पैमाने पर ऑनलाइन फैल चुका है। उनका कहना था कि डिजिटल सर्कुलेशन हार्ड कॉपी से ज्यादा है। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि सरकार को ऑनलाइन मौजूद सामग्री हटाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

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क्या किताब की कॉपियां जब्त होंगी?

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस चैप्टर वाली किताब की सभी कॉपियां तुरंत जब्त की जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ किताब वापस लेने की घोषणा काफी नहीं है, जब तक वह बाजार और सोशल मीडिया से पूरी तरह हटाई न जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसा लगता है कि ज्यूडिशियरी को बदनाम करने के लिए एक "गहरी, सोची-समझी साज़िश" थी। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रिए चैप्टर और उसके कंटेंट के डिजिटल फैलाव पर "पूरी तरह बैन" लगा दिया।

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क्या यह कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का मामला बन सकता है?

कोर्ट ने यूनियन एजुकेशन मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी और NCERT के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें पूछा गया कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​का केस क्यों न चलाया जाए। CJI ने किताब की ऑनलाइन और फिजिकल कॉपी ज़ब्त करने का भी निर्देश दिया। CJI ने कहा कि ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करना उनका फ़र्ज़ है और "उनका सिर कटना चाहिए।" CJI ने कहा कि "किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा," और मामले की "गहरी जांच" की मांग की। बेंच ने यह भी चेतावनी दी कि अगर किताब पर पूरी तरह बैन के निर्देशों का किसी भी तरह से उल्लंघन किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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क्यों बना यह मामला इतना बड़ा?

यह मामला सिर्फ एक टेक्स्टबुक का नहीं है। यह सवाल उठाता है कि छात्रों को क्या पढ़ाया जाना चाहिए, किस तरह की भाषा इस्तेमाल होनी चाहिए और संस्थाओं की छवि को कैसे संतुलित तरीके से पेश किया जाए। अगर शिक्षा में एकतरफा जानकारी दी जाती है, तो उसका असर आने वाली पीढ़ी की सोच पर पड़ सकता है।

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