शिवसेना (उद्धव गुट) में बड़ी टूट की आशंका है, जिसके चलते उद्धव ठाकरे ने सांसदों की आपात बैठक बुलाई है। उनके 9 में से 4 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें हैं। 2 सांसद इस बैठक में नहीं पहुंचे।

मुंबई: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब शिवसेना (उद्धव गुट) में भी बड़ी टूट के संकेत मिल रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। खबरें हैं कि उनके कुछ सांसद शिवसेना के शिंदे गुट के संपर्क में हैं। उद्धव की यह कोशिश पार्टी को टूटने से बचाने की है। लोकसभा में उद्धव गुट के कुल 9 सांसद हैं, जिनमें से 4 के पाला बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। मुंबई में यह मीटिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन खबर है कि दो सांसद इस बैठक में नहीं पहुंचे हैं।

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शिवसेना में यह बगावत की खबर ठीक तब आई है, जब तृणमूल कांग्रेस में भी ऐसी ही हलचल मची हुई है। लोकसभा में शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 सांसद हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 7 सांसद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिंदे गुट उद्धव की पार्टी के 6 सांसदों से बातचीत कर रहा है। चर्चा है कि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, दो सांसदों, अरविंद सावंत और अनिल देसाई, ने साफ कर दिया है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही मजबूती से खड़े रहेंगे। अगर बाकी सांसद पाला बदलते हैं, तो इससे लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार को बड़ी बढ़त मिल जाएगी।

TMC के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर एक अलग गुट के तौर पर मान्यता देने के लिए चिट्ठी सौंपेंगे। फिलहाल, NDA के पास 293 सांसद हैं। अगर TMC के बागी सांसद साथ आते हैं तो यह आंकड़ा 313 हो जाएगा। बीजेपी की कोशिश शिवसेना के सांसदों को भी अपने पाले में लाकर इस संख्या को 320 तक पहुंचाने की है। इनके अलावा, लोकसभा में छोटी पार्टियों और निर्दलीय मिलाकर 10 और सांसद हैं। कहा जा रहा है कि बीजेपी का बड़ा लक्ष्य DMK के 22 सांसदों को भी साथ लाना है, ताकि दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जा सके। इससे सरकार को महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम बिल पास कराने में आसानी होगी।