TMC ने EC के बंगाल स्टाफ़ नियम के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, CJI का फास्ट-ट्रैक फैसला

Published : May 02, 2026, 09:32 AM IST

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026 से ठीक पहले TMC बनाम EC विवाद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति पर उठे सवाल, हाई कोर्ट से झटका-अब CJI की तत्काल सुनवाई। क्या बदलेंगे काउंटिंग नियम या बढ़ेगा सस्पेंस? 

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TMC Supreme Court Plea: पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले सियासत और न्यायपालिका के बीच एक नई टकराव की कहानी सामने आ गई है। तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress (TMC)) ने भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India (ECI)) के एक अहम फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court of India) का दरवाज़ा खटखटाया है और अब मामला बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।

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अचानक सुप्रीम कोर्ट में दस्तक, क्या है असली दांव?

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026 से ठीक दो दिन पहले TMC का सुप्रीम कोर्ट जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी ने चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना केंद्रों पर सुपरवाइज़र के तौर पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुनवाई के निर्देश दिए हैं। अब यह सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने होगी।

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हाई कोर्ट से झटका, अब सुप्रीम कोर्ट की शरण

इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने TMC की याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस कृष्णा राव ने साफ कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह राज्य या केंद्र-किसी भी स्तर के कर्मचारियों को मतगणना के लिए नियुक्त कर सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में कोई गैर-कानूनी पहलू नहीं है।

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TMC की आशंका बनाम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

TMC का मुख्य तर्क यह था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी सत्ताधारी दल से प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मतगणना प्रक्रिया में कई स्तर के निगरानी तंत्र मौजूद होते हैं-जैसे माइक्रो ऑब्जर्वर, एजेंट और अन्य अधिकारी। ऐसे में किसी एक पक्ष के प्रभाव की संभावना बेहद सीमित है।

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क्या यह सिर्फ नियमों की लड़ाई है या राजनीतिक रणनीति?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है। चुनाव परिणाम से ठीक पहले इस तरह की कानूनी चुनौती माहौल को प्रभावित कर सकती है।  TMC के वकील कल्याण बनर्जी ने इसे “अधिकार क्षेत्र से बाहर” का फैसला बताया, जबकि चुनाव आयोग ने इसे पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला कदम बताया है।

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अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर

पूरा देश अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजरें टिकाए हुए है। क्या कोर्ट चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखेगा या TMC को राहत मिलेगी-यह आने वाले घंटों में साफ हो जाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस कानूनी जंग ने चुनावी माहौल को और भी ज्यादा रोमांचक और तनावपूर्ण बना दिया है।

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