
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक ऊर्जा संकट पर विस्तार से चर्चा की। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि इस बातचीत में खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस कारोबार के लिए बेहद अहम माना जाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी क्षेत्र का वह समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। लेकिन ईरान से जुड़े मौजूदा युद्ध की वजह से यहां से गुजरने वाला कारोबार लगभग रुक गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक यह हालात वैश्विक तेल सप्लाई के लिए अब तक की सबसे बड़ी रुकावट माने जा रहे हैं। इसका असर दुनियाभर में ईंधन की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
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इस बातचीत से एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का फैसला किया था। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की ईरान के साथ बातचीत चल रही है और कोशिश है कि युद्ध खत्म किया जाए। हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका बातचीत को लेकर गलत जानकारी दे रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि युद्ध के हालात के बीच भारत यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत इस समय कूटनीतिक बातचीत के रास्ते पर चल रहा है ताकि तनाव कम किया जा सके।
पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में भारत हर संभव जगह से तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रहा है, ताकि देश की जरूरतें पूरी की जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चाहता है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहे। इसके लिए भारत ईरान, इजराइल और अमेरिका से लगातार संपर्क में है।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके बाद से मिडिल ईस्ट के कई इलाकों में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। करीब 25 दिनों से जारी इस संघर्ष में अब तक 2600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में करीब 1500 लोगों की जान गई है, जबकि लेबनान में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इजराइल में 16 लोगों की मौत हुई है और 13 अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में मारे गए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में जमीन और समुद्र में कई आम नागरिक भी इस युद्ध की चपेट में आए हैं।
भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सरकार की कोशिश है कि ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित न हो और क्षेत्र में जल्द शांति बहाल हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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