
US India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच एक तरफ जहां लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में तीन दिवसीय हाई-लेवल बैठक चल रही है, वहीं दूसरी तरफ वॉशिंगटन से आई एक खबर ने भारतीय बाजार और सरकार की नींद उड़ा दी है। ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर कड़े तेवर दिखाते हुए भारतीय सामानों के आयात (Import) पर 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क (Extra Tariff) लगाने का एक बेहद चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा है। इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं में एक बहुत बड़ा सस्पेंस और तनाव पैदा कर दिया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत को उन 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची में शामिल किया है, जिन पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है। USTR की सेक्शन 301 जांच के अनुसार, यदि कोई देश कथित तौर पर ऐसे उत्पादों के व्यापार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाता है, तो उस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। भारत के साथ-साथ जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब जैसे कई बड़े अमेरिकी साझेदार भी इस सूची में शामिल हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की एक हालिया जांच रिपोर्ट है। ऑफिस ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत करीब 60 मामलों की जांच के निष्कर्ष जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में भारत सहित दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं पर यह संगीन आरोप लगाया गया है कि वे कथित तौर पर 'जबरन श्रम' (Forced Labour) से बनने वाले सामानों के आयात को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही हैं।
USTR एम्बेसडर जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव करते हुए साफ कहा कि वैश्विक स्तर पर जबरन मजदूरी से बने सामानों की वजह से अमेरिकी मजदूरों को 'असमान मैदान' पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, जो अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस सूची में भारत अकेला नहीं है, अमेरिका ने अपने बेहद करीबी सहयोगियों जैसे यूनाइटेड किंगडम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इज़राइल और सऊदी अरब को भी इस कटघरे में खड़ा कर दिया है।
यूएसटीआर (USTR) के इस नए प्रस्ताव के तहत दो तरह के अतिरिक्त टैक्स स्लैब तैयार किए गए हैं, जो भारतीय निर्यातकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं:
इस अतिरिक्त टैरिफ के लागू होने से भारत के तीन सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र-टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग), इंजीनियरिंग सामान और फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां) सबसे बुरी तरह प्रभावित होंगे। टैक्स बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे देश के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में भारी गिरावट आ सकती है। हालांकि, USTR ने टेक्सटाइल और कपड़ों के लिए एक अलग कोटे का भी प्रस्ताव दिया है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
इस पूरे व्यापार युद्ध (Trade War) के बीच हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला भी सामने आया है, जिसने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए कुछ बड़े टैरिफ को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि टैक्स लगाने के लिए पुख्ता 'कानूनी आधार' होना अनिवार्य है। इस फैसले ने अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका फायदा भारतीय वार्ताकार उठा सकते हैं।
दूसरी तरफ, भारत ने भी अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भारत ने यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करके अपने एक बड़े एक्सपोर्ट हिस्से के लिए लगभग 'जीरो-ड्यूटी एक्सेस' हासिल कर लिया है। इसके अलावा, भारत अब यूरोपियन यूनियन (EU) और अन्य देशों के साथ भी एक्टिव रूप से समझौते कर रहा है। अब देखना यह होगा कि नई दिल्ली में चल रही तीन दिवसीय बैठक में भारतीय अधिकारी ट्रंप प्रशासन के इस 12.5% टैरिफ के चक्रव्यूह को कैसे भेदते हैं।
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