NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित (CBT) बनाने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सरकार नंदन नीलेकणि कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही अंतिम फैसला करेगी। तब तक परीक्षा पेन-पेपर मोड में ही होने की संभावना है।

नई दिल्लीः मेडिकल की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सरकार इस बड़े बदलाव पर कोई भी अंतिम फैसला नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली एक हाई-लेवल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद ही करेगी। इस फैसले का सीधा मतलब है कि NEET-UG के ऑनलाइन होने की प्रक्रिया अभी और लंबा इंतज़ार करेगी। जब तक नीलेकणि की अध्यक्षता वाली कमेटी अपनी सिफारिशें नहीं सौंप देती, तब तक इस बदलाव की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। यह कदम दिखाता है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में कोई भी बड़ा फेरबदल करने से पहले पूरी तरह से सोच-विचार करना चाहती है।

क्यों रुका CBT मोड पर फैसला?

दरअसल, परीक्षा प्रणाली में इतने बड़े बदलाव को लागू करने से पहले सरकार पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहती है। इसीलिए एक एक्सपर्ट टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि हैं। अब सारी निगाहें इसी कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह टास्क फोर्स परीक्षा को और बेहतर और सुरक्षित बनाने के तरीकों पर अपनी सिफारिशें देगी। सरकार का मानना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में जल्दबाज़ी में लिया गया कोई भी कदम ठीक नहीं होगा। इसलिए, कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट का इंतज़ार करना ही सबसे सही विकल्प माना गया है।

छात्रों के लिए क्या हैं इसके मायने?

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ेगा जो NEET-UG की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल, उन्हें परीक्षा के पैटर्न में किसी भी तरह के तत्काल बदलाव को लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। जब तक टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट नहीं देती और सरकार उस पर कोई फैसला नहीं लेती, तब तक परीक्षा पुराने यानी पेन-पेपर मोड में ही होने की पूरी संभावना है। यह खबर उन छात्रों के लिए यकीनन एक राहत की बात हो सकती है जो कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट को लेकर बहुत सहज नहीं हैं। हालांकि, यह भी साफ है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह पूरी तैयारी और एक्सपर्ट राय के साथ ही आगे बढ़ेगी। कुल मिलाकर, गेंद अब नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली कमेटी के पाले में है। उनकी रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा का भविष्य क्या होगा - कागज़ और पेन या फिर कंप्यूटर का कीबोर्ड और माउस।