Published : Jan 20, 2026, 04:25 PM ISTUpdated : Jan 20, 2026, 04:27 PM IST
Trump Threats to France: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को चेतावनी दी है कि अगर उसने अमेरिका के प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने से इनकार किया, तो फ्रेंच वाइन और शैम्पेन पर 200% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दिया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का नाम लेते हुए यह धमकी दी और उनके साथ हुई एक पर्सनल बातचीत का मैसेज भी सार्वजनिक कर दिया।
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ट्रंप ने मैक्रों को लेकर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं उसकी (फ्रांस) वाइन और शैम्पेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा और वह शामिल हो जाएगा। हालांकि, उसे शामिल होने की जरूरत नहीं है।” इसके बाद ट्रंप ने मैक्रों का एक पर्सनल मैसेज भी पोस्ट किया, जिसमें फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा था कि वे ईरान और सीरिया के मुद्दों पर ट्रंप से सहमत हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर इतना जोर क्यों दे रहे हैं।
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फ्रांस ने टैरिफ धमकी को बताया ‘अस्वीकार्य’
ट्रंप की 200 प्रतिशत टैरिफ धमकी पर फ्रांस की ओर से कड़ा जवाब आया। राष्ट्रपति मैक्रों के करीबी सूत्र के मुताबिक, फ्रांस की विदेश नीति को प्रभावित करने के लिए टैरिफ की धमकियां न सिर्फ अस्वीकार्य हैं, बल्कि पूरी तरह बेअसर भी हैं। सूत्र ने साफ किया कि फ्रांस अपने फैसले ऐसे दबाव में बदलने वाला नहीं है।
फ्रांस और अमेरिका के बीच तनाव तब और बढ़ गया, जब पेरिस ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी रुख का मजाक उड़ाया। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ट्रंप के ग्रीनलैंड पर जो देने का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति आर्कटिक क्षेत्र में रूस से भविष्य के संभावित खतरों को लेकर चिंतित हैं। स्कॉट बेसेंट ने कहा, “आर्कटिक में भविष्य की लड़ाई असली है। अगर ग्रीनलैंड पर रूस या किसी और ने हमला किया तो नाटो को दखल देना पड़ेगा।
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फ्रांस ने उड़ाया अमेरिका का मजाक
फ्रांसीसी यूरोप और विदेश मामलों के मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में अमेरिकी तर्क का मजाक उड़ाया। पोस्ट में लिखा गया, “अगर किसी दिन आग लग सकती है, तो बेहतर है कि अभी घर जला दिया जाए। अगर कभी शार्क हमला कर सकती है, तो बेहतर है कि अभी लाइफगार्ड को ही खा लिया जाए। अगर कभी एक्सीडेंट हो सकता है, तो बेहतर है कि अभी कार को टक्कर मार दी जाए।” इन उदाहरणों के जरिए फ्रांस ने अमेरिका की ग्रीनलैंड नीति को तर्कहीन बताया।
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‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है, जिस पर हुआ विवाद?
अमेरिका द्वारा प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” को शुरुआत में युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, इसके चार्टर में यह साफ नहीं है कि इसकी भूमिका सिर्फ गाजा या कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों तक ही सीमित रहेगी। इसी वजह से फ्रांस ने इस बोर्ड में शामिल होने को लेकर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।
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