ट्रंप ने मोदी को दिया न्योता, जानें क्यों-कैसे इतना अहम दावेदार बना भारत?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को प्रस्तावित “गाजा बोर्ड ऑफ पीस” का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। यह बोर्ड युद्ध के बाद गाजा में गवर्नेंस और रिकंस्ट्रक्शन की जिम्मेदारी संभालेगा। खबर है कि पाकिस्तान को भी इसका न्योता मिला है।

गाजा बोर्ड ऑफ पीस की संरचना क्या होगी?
व्हाइट हाउस के मुताबिक इस पहल के तहत तीन प्रमुख इकाइयां बनाई जाएंगी। पहली मेन बोर्ड, जिसकी अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। दूसरी फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स की कमेटी, जो गाजा के प्रशासन और शासन को संभालेगी। इसके अलावा एक अलग एग्जीक्यूटिव बोर्ड रहेगा, जो सलाहकार की भूमिका निभाएगा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी बोर्ड के सभी सदस्यों और उनकी जिम्मेदारियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।
भारत क्यों बना अहम दावेदार?
भारत को इस बोर्ड में शामिल करने की एक बड़ी वजह यह है कि भारत के इज़राइल के साथ रणनीतिक संबंध हैं। भारत फिलिस्तीन को लगातार मानवीय सहायता देता रहा है। हालिया संघर्ष के बाद मिस्र के रास्ते गाजा को मदद भेजने वाले शुरुआती देशों में भारत भी शामिल था। इसी संतुलित रुख के चलते भारत दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य देश माना जाता है।
पाकिस्तान को भी मिला न्योता, इजराइल की आपत्ति
पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे ट्रंप की ओर से गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का इनविटेशन मिला है। लेकिन, भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि गाजा के भविष्य में किसी भी भूमिका के लिए पाकिस्तान हमें स्वीकार नहीं होगा।
नेतन्याहू सरकार ने क्यों जताई आपत्ति?
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा है कि इस बोर्ड की संरचना इज़राइल से कोऑर्डिनेशन के बिना बनाई गई, जो हमारी नीति के खिलाफ है। खासकर तुर्की की भागीदारी और कतर के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को लेकर इजराइल ने इस पर असहमति जताई है।
60 देशों को भेजा गया न्योता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 60 देशों को न्योते भेजे गए हैं। अब तक सिर्फ हंगरी ने इसका खुलकर समर्थन किया है। कई देशों ने पब्लिक बयान देने से परहेज किया है। गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के प्रमुख सदस्यों में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, UN मध्य पूर्व शांति समन्वयक सिग्रिड काग, UAE की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री रीम अल-हाशिमी, इजरायली-साइप्रस अरबपति याकिर गबे, कतर और UAE के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
ट्रंप का 20-पॉइंट शांति प्लान और बोर्ड की भूमिका
गाजा बोर्ड ऑफ पीस 15 जनवरी को घोषित ट्रंप के 20-पॉइंट गाजा पीस प्लान का हिस्सा है। डिप्लोमैट्स का मानना है कि भविष्य में यह मॉडल दुनिया के अन्य बड़े संघर्षों को सुलझाने का ढांचा बन सकता है। हालांकि, ज्यादातर सरकारों ने ट्रंप की इस पहल पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। डिप्लोमैट्स का कहना है कि यह मैकेनिज्म संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को कमजोर कर सकता है।
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