
लखनऊ से लेकर मेरठ और गोरखपुर से लेकर प्रयागराज तक, उत्तर प्रदेश की सड़क तस्वीर तेजी से बदल रही है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने जिस तरह एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर निवेश किया है, वह अब जमीनी हकीकत बनता दिख रहा है। आने वाले महीनों में तीन बड़े एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू होने की तैयारी में हैं, जबकि कई मेगा प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं।
यूपी अब केवल सड़कों का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि एक समग्र “एक्सप्रेसवे ग्रिड” तैयार कर रहा है, जो राज्य को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर नई पहचान देगा। 22 एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित नेटवर्क इसी रणनीति का हिस्सा है—कुछ ग्रीनफील्ड, तो कुछ बड़े राजमार्गों को जोड़ने वाले लिंक कॉरिडोर।
Ganga Expressway पश्चिमी यूपी से पूर्वी यूपी को जोड़ने वाला सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरता है।
यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक निवेश, कृषि परिवहन और धार्मिक पर्यटन—तीनों को गति देने वाला माना जा रहा है।
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Lucknow-Kanpur Expressway, जिसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) भी कहा जाता है, करीब 63 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर है। भविष्य में इसे 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
लखनऊ के स्कूटर इंडिया चौराहे के पास अंतिम चरण का कार्य जारी है। संभावना है कि इसे मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह या अप्रैल में जनता के लिए खोल दिया जाए।
Gorakhpur-Shamli Expressway यूपी का सबसे लंबा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे होगा, जिसकी लंबाई करीब 750 किलोमीटर है। यह 22 जिलों से गुजरेगा और पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वांचल से जोड़ेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
Delhi-Dehradun Expressway का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। 210 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे दिल्ली से देहरादून की यात्रा को 6–7 घंटे से घटाकर 2.5–3 घंटे में समेट देगा।
यह कॉरिडोर पर्यटन, उद्योग और रियल एस्टेट को नई रफ्तार देगा।
यूपी के इस विस्तृत एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लाभ केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ तेज कनेक्टिविटी लॉजिस्टिक्स लागत घटाएगी और व्यापार को प्रोत्साहित करेगी।
राज्य सरकार ने 22 एक्सप्रेसवे का जो ग्रिड तैयार किया है, उसमें बड़े ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिले। परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो यूपी देश के सबसे मजबूत सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे मॉडल केवल दूरी घटाने का प्रयास नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का रोडमैप है। समय की बचत, ईंधन की कमी, बेहतर लॉजिस्टिक्स और निवेश के अवसर—इन सभी का सीधा संबंध बेहतर सड़क ढांचे से है।
आने वाले दो-तीन वर्षों में जब ये परियोजनाएं पूरी तरह चालू होंगी, तो यूपी की कनेक्टिविटी देश में एक मिसाल बन सकती है।
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