
लखनऊ। योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए लगातार सख्त कार्रवाई की है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। सरकार का दावा है कि अब उत्तर प्रदेश में बेटियां निडर होकर नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं। बेहतर कानून व्यवस्था के कारण प्रदेश आम जनता, व्यापारियों और निवेशकों के लिए सुरक्षित स्थान बनकर उभरा है। इससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आई है।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत योगी सरकार ने बड़े स्तर पर अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया। वर्ष 2017 से अब तक 269 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए और 10,990 घायल हुए। इसके अलावा 22,306 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। 85,118 अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट और 977 अपराधियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई।
सरकार ने अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत 145 अरब 79 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की। साथ ही 68 चिन्हित माफिया और उनके सहयोगियों के खिलाफ 875 मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन अपराधियों से 4,137 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की गई, जिससे अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ा।
प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था के लिए 7 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई। इससे पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण में सुधार हुआ। सरकार के अनुसार 2017 के बाद से प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा या जातीय संघर्ष नहीं हुआ है, जो कानून व्यवस्था में सुधार का संकेत है।
योगी सरकार ने केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उन्हें सजा दिलाने पर भी जोर दिया। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 1,25,985 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया। इनमें 79 अपराधियों को मृत्युदंड, 10,414 को आजीवन कारावास और 1,921 को 20 वर्ष से अधिक की सजा मिली। इसके अलावा हजारों अपराधियों को विभिन्न अवधि की सजा दिलाई गई। चिन्हित माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 35 माफिया और 94 सहयोगियों को आजीवन कारावास तथा 2 अपराधियों को मृत्युदंड दिलाया गया।
सरकार के अनुसार वर्ष 2016 की तुलना में कई गंभीर अपराधों में बड़ी कमी दर्ज की गई है।
ये आंकड़े कानून व्यवस्था में सुधार को दर्शाते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कई अभियान चलाए हैं, जैसे मिशन शक्ति, ऑपरेशन गरुड़, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन दृष्टि, ऑपरेशन बचपन, ऑपरेशन खोज, ऑपरेशन डिस्ट्रॉय और ऑपरेशन रक्षा। प्रदेश के हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया। इसके तहत 5 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की गई, जिसमें 1.85 करोड़ को चेतावनी दी गई और 38,835 लोगों पर कार्रवाई हुई। महिला हेल्पलाइन 1090, 181 और अन्य सेवाओं को एकीकृत कर शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था की गई है।
प्रदेश में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महिला पुलिस की संख्या बढ़ाई गई।
बलरामपुर, जालौन, मीरजापुर, शामली और बिजनौर में नई बटालियन की प्रक्रिया जारी साथ ही प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए और करीब 40 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।
सरकार के अनुसार महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच:
महिला संबंधी मामलों के निस्तारण की दर 98.90% तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है। पेंडेंसी दर भी केवल 0.20% है, जिससे यूपी इस मामले में शीर्ष पर है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में हजारों अभियुक्तों को सजा दिलाई गई है, जिससे न्याय प्रणाली और मजबूत हुई है।
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