UPI से पता ही नहीं चलता कितना खर्च हुआ! 3 महीने कैश अपनाने के बाद महिला ने बताया क्या बदल गया

Published : Aug 01, 2026, 11:58 AM ISTUpdated : Aug 01, 2026, 12:00 PM IST
UPI vs Cash Spending Habits

सार

UPI vs Cash Spending Habits: UPI से बार-बार छोटे पेमेंट कर रहे हैं? दिल्ली की एक महिला ने 3 महीने कैश अपनाकर खर्च पर कंट्रोल करने का अनुभव शेयर किया। जानें क्या बदला।

Instagram Viral Video: आज के समय में UPI ने खरीदारी को इतना आसान बना दिया है कि कई बार लोग बिना सोचे-समझे छोटे-छोटे पेमेंट करते रहते हैं। दिन खत्म होने पर पता चलता है कि हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। दिल्ली की रहने वाली इंस्टाग्राम यूजर सदफ ने इसी आदत को बदलने के लिए तीन महीने पहले एक अलग फैसला लिया। उन्होंने रोजमर्रा के ज्यादातर खर्चों के लिए UPI की जगह कैश का इस्तेमाल शुरू किया। उनका कहना है कि इस बदलाव ने उन्हें अपने खर्चों को पहले से ज्यादा समझने और गैर-जरूरी खरीदारी रोकने में मदद की।

कैश से पेमेंट करते समय हर रुपये का एहसास हुआ

सदफ के मुताबिक, UPI से भुगतान करना बेहद आसान होता है। यही वजह है कि 100-200 रुपये के कई ट्रांजैक्शन कब मिलकर 1,000 रुपये या उससे ज्यादा बन जाते हैं, इसका एहसास भी नहीं होता। वहीं, जब उन्होंने नकद पैसे देना शुरू किया तो हर बार जेब से निकलने वाले नोट का एहसास हुआ। इससे उन्हें तुरंत समझ आने लगा कि कितना पैसा खर्च हो चुका है और कितना अभी बचा हुआ है। उनका कहना है कि इसी वजह से अचानक होने वाले कई फालतू खर्च अपने आप कम हो गए।

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बजट संभालना भी हुआ आसान, लेकिन पूरी तरह UPI छोड़ना नहीं है संभव

उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ कैश के भरोसे रहना हर स्थिति में आसान नहीं है। कई दुकानों पर खुले पैसे नहीं मिलते या दुकानदार छुट्टे लौटा नहीं पाते। ऐसे मामलों में डिजिटल पेमेंट ही सबसे आसान विकल्प बन जाता है। इसलिए अब उन्होंने एक संतुलित तरीका अपनाया है। वह अपने खर्च के लिए करीब 80 प्रतिशत रकम कैश में रखती हैं और बाकी 20 प्रतिशत जरूरत पड़ने पर UPI से भुगतान करती हैं। नीचे देखें वायरल वीडियो-

 

 

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली राय

सदफ का अनुभव सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय पर काफी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने कहा कि कैश इस्तेमाल करने से खर्च पर बेहतर नियंत्रण रहता है, लेकिन खुले पैसे की समस्या अक्सर सामने आती है। कई यूजर्स ने लिखा कि दुकानदार अब छोटे नोट या छुट्टे रखने से बचते हैं, इसलिए कई बार मजबूरी में UPI करना पड़ता है।

वहीं कुछ लोगों ने यह भी बताया कि उन्होंने हाल के महीनों में अलग-अलग कारणों से UPI का इस्तेमाल कम किया है। दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे यूजर्स भी थे जिन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट की सुविधा आज की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है और वे लगभग हर भुगतान UPI से ही करते हैं।

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क्या सीख मिलती है इस अनुभव से?

यह अनुभव बताता है कि समस्या UPI नहीं, बल्कि बिना सोचे-समझे होने वाला खर्च है। अगर बार-बार छोटे ट्रांजैक्शन आपकी सेविंग्स को प्रभावित कर रहे हैं, तो कैश और डिजिटल पेमेंट का संतुलित इस्तेमाल बेहतर विकल्प हो सकता है। महीने का तय बजट बनाना, गैर-जरूरी खरीदारी से बचना और खर्च पर नियमित नजर रखना ऐसी आदतें हैं जो किसी भी पेमेंट मोड के साथ आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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