दुश्मन के इलाके में पायलट कैसे ज़िंदा रहते हैं? US Air Force के सीक्रेट सर्वाइवल सिस्टम की पूरी कहानी

Published : Apr 04, 2026, 11:40 AM IST

ईरान में F-15E क्रैश के बाद लापता पायलट की तलाश जारी है। US Air Force का SERE आधारित सर्वाइवल सिस्टम, किट और ट्रेनिंग पायलट को दुश्मन इलाके में जिंदा रहने, छिपने और रेस्क्यू तक पहुंचने में कैसे मदद करता है-जानिए पूरी कहानी।

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US Air Force Survival System: जब कोई फाइटर जेट दुश्मन के इलाके में गिरता है, तो असली लड़ाई तभी शुरू होती है। दक्षिणी ईरान में US F-15E जेट के गिरने के बाद एक पायलट अभी भी लापता है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या कोई पायलट दुश्मन की ज़मीन पर अकेले ज़िंदा रह सकता है? जवाब है—हां, लेकिन इसके पीछे होता है एक बेहद एडवांस US Air Force Survival System, जो टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और रणनीति का जबरदस्त कॉम्बिनेशन है।

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F-15E Crash Iran: आखिर क्या हुआ उस दिन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेट तकनीकी खराबी या हमले के कारण क्रैश हुआ। दोनों पायलटों ने समय रहते eject किया। एक को बचा लिया गया, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है। ऐसे हालात में हर सेकंड कीमती होता है-क्योंकि दुश्मन की सेना भी तलाश में होती है।

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SERE Training क्या है और क्यों है इतनी खतरनाक?

SERE का मतलब है-Survival, Evasion, Resistance, Escape (सर्वाइवल (ज़िंदा रहना), इवेज़न (बचना), रेजिस्टेंस (विरोध), एस्केप (निकलना))।यानी पायलट को सिखाया जाता है:

  • कैसे जिंदा रहना है।
  • दुश्मन से कैसे बचना है।
  • पकड़े जाने पर कैसे मानसिक रूप से मजबूत रहना है और मौका मिलते ही कैसे भाग निकलना है।

यह ट्रेनिंग इतनी कठिन होती है कि पायलटों को जंगल, बर्फ, रेगिस्तान और कैद जैसी परिस्थितियों में डाला जाता है।

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Pilot Survival Kit: क्या होता है इसमें जो बनता है ‘लाइफलाइन’?

जब पायलट eject करता है, तो उसके साथ एक खास सर्वाइवल किट भी जमीन पर आती है। यही उसकी असली उम्मीद होती है। इसमें शामिल होते हैं:

  • सर्वाइवल रेडियो और GPS बीकन-लोकेशन भेजने के लिए।
  • कंपास और सिग्नल मिरर- दिशा और संकेत देने के लिए।
  • फ्लेयर और स्मोक सिग्नल-रेस्क्यू टीम को दिखने के लिए।
  • पानी और शुद्धिकरण टैबलेट – जिंदा रहने के लिए।
  • हाई-एनर्जी फूड पैक-3-7 दिन तक ऊर्जा के लिए।
  • फर्स्ट एड किट-चोट संभालने के लिए।
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दुश्मन इलाके में पायलट खुद को कैसे छुपाता है?

सबसे बड़ा खतरा होता है-दुश्मन की नजर में आना। इसलिए पायलट:

  • दिन में छुपकर रहता है।
  • रात में मूव करता है।
  • रेडियो का सीमित इस्तेमाल करता है।
  • प्राकृतिक कवर (जंगल/पहाड़) का उपयोग करता है।

ईरान के ज़ाग्रोस पहाड़ जैसे इलाकों में छिपना आसान नहीं होता-लेकिन ट्रेनिंग ही उसे जिंदा रखती है।

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Rescue Mission: पायलट को कैसे ढूंढती है US Army?

जैसे ही पायलट eject करता है, एक “Combat Search and Rescue (CSAR)” ऑपरेशन शुरू हो जाता है।

  • सैटेलाइट और ड्रोन लोकेशन ट्रैक करते हैं
  • हेलीकॉप्टर और स्पेशल फोर्सेज भेजी जाती हैं
  • पायलट के सिग्नल का इंतजार होता है
  • लेकिन खतरा ये है-दुश्मन भी उसी सिग्नल को पकड़ सकता है।

मौसम, भूख और चोट-तीनों से कैसे लड़ता है पायलट?

  • सर्वाइवल सिर्फ दुश्मन से बचना नहीं है।
  • पायलट को झेलना पड़ता है:
  • ठंड या गर्मी
  • भूख और प्यास
  • चोट और थकान

इसके लिए किट में थर्मल कंबल, पोंचो और आग जलाने के साधन होते हैं।

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अगर पायलट समुद्र में गिर जाए तो क्या होता है?

ऐसे मामलों में किट बदल जाती है:

  • लाइफ राफ्ट (नाव)
  • सी डाई (पानी में रंग फैलाकर लोकेशन दिखाना)
  • फ्लोटेशन डिवाइस
  • ये चीजें समुद्र में रेस्क्यू को आसान बनाती हैं।

क्या पायलट के पास हथियार भी होता है?

हां, लेकिन ये आखिरी विकल्प होता है। पायलट के पास छोटी पिस्तौल या सर्वाइवल राइफल हो सकती है-सिर्फ आत्मरक्षा के लिए, हमला करने के लिए नहीं।

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Modular System: हर मिशन के हिसाब से बदलता है सेटअप

US Air Force का सिस्टम फिक्स नहीं है।

  • रेगिस्तान-ज्यादा पानी
  • बर्फीला इलाका-ज्यादा गर्म कपड़े
  • समुद्र-लाइफ राफ्ट

यानी हर मिशन के लिए अलग रणनीति।

क्या हर पायलट बच पाता है? सच्चाई जानिए

सच ये है कि हर बार सफलता नहीं मिलती। लेकिन यह सिस्टम और ट्रेनिंग मिलकर पायलट के बचने की संभावना कई गुना बढ़ा देते हैं। ईरान में लापता पायलट की तलाश जारी है। क्योंकि दुश्मन के इलाके में असली युद्ध तब शुरू होता है, जब पायलट जमीन पर उतरता है…

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