
US Canada Trade Talks: अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। तनाव कम करने के लिए कई महीनों से चल रही बातचीत किसी समझौते तक पहुंचने से पहले ही टूट गई। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया। जवाब में कनाडा ने भी कई अमेरिकी उत्पादों पर नए जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह टकराव सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेद अब USMCA व्यापार समझौते के भविष्य और दशकों पुराने रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
कई महीनों की बातचीत के बाद दोनों देश समझौते के करीब दिखाई दे रहे थे। लेकिन अंतिम प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कहा कि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांग की और बदले में बहुत कम पेशकश की। कार्नी के मुताबिक, कनाडा अपनी संप्रभुता और प्रमुख उद्योगों से समझौता करने के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ओटावा अब अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को पहले की तरह मानकर नहीं चल रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का दावा है कि वॉशिंगटन ने कनाडा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रियायतें देने की पेशकश की थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य ट्रेड नेगोशिएटर जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने कनाडाई लकड़ी, स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में टैरिफ कम करने का प्रस्ताव रखा था। यानी दोनों पक्षों की कहानी अलग है-और यही गतिरोध का सबसे बड़ा कारण बन गया है।
अमेरिका का नया 50% टैरिफ कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान को प्रभावित करेगा। यह कनाडा के अमेरिका को होने वाले सालाना एक्सपोर्ट का लगभग 5% है। इस दायरे में टंग डिप्रेशर और हॉकी स्टिक जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा कई औद्योगिक सामान भी शामिल हैं। इसका असर सिर्फ कनाडाई कंपनियों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। अमेरिकी आयातकों को टैरिफ चुकाना पड़ता है, जिसका बोझ आगे चलकर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बढ़ी कीमतों के रूप में पड़ सकता है। यही वजह है कि यह व्यापार युद्ध दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगा साबित हो सकता है।
कनाडा ने संकेत दिया है कि वह 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ लागू करेगा। प्रधानमंत्री कार्नी के मुताबिक, डेयरी, स्टील, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और पल्प-पेपर जैसे क्षेत्रों को निशाना बनाया जा सकता है। कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपने नए टैरिफ में पर्याप्त कमी करता है, तो कनाडा भी अमेरिकी एल्युमीनियम, स्टील और मोटर वाहनों पर लगाए गए मौजूदा जवाबी शुल्क हटाने को तैयार है। लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।
🇨🇦⚔️🇺🇸 Canada suspended trade talks with the US late Friday (Aug. 21), and Washington's 50% tariffs took effect at midnight — reigniting the trade war. PM Mark Carney said last-minute US changes were "unfair, uneconomic, and called into question the reliability of any deal,"… pic.twitter.com/45Z76o7nUl
— 🔥🗞The Informant (@theinformant_x) August 22, 2026
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल केवल टैरिफ नहीं, बल्कि USMCA का भविष्य है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच यह व्यापार समझौता उत्तरी अमेरिकी सप्लाई चेन की रीढ़ माना जाता है। तीनों देशों को इसके भविष्य पर फिर से विचार करना है, लेकिन वॉशिंगटन और ओटावा के बीच बढ़ता तनाव इस प्रक्रिया को मुश्किल बना सकता है। अगर व्यापार विवाद लंबा खिंचता है, तो ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन और निवेश रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं बेहद गहराई से जुड़ी हुई हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच सामान और सेवाओं का व्यापार करीब 880 अरब डॉलर रहा। कनाडा के लगभग 72% भौतिक निर्यात का गंतव्य अमेरिका है। दोनों देशों की करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और हर दिन लगभग 3.3 लाख लोग इसे पार करते हैं। सीमा के आर-पार रोजाना करीब 2 अरब डॉलर का व्यापार होता है। लिए लंबे समय तक चलने वाला टैरिफ युद्ध किसी एक देश को आसानी से नुकसान पहुंचाकर खत्म नहीं होगा। इसका असर दोनों तरफ की कंपनियों, कामगारों और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
इस विवाद का राजनीतिक पहलू भी बेहद अहम है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ को एक प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। वहीं कनाडा इसे अपने आर्थिक हितों और संप्रभुता पर दबाव के रूप में देख रहा है। ट्रंप का कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का सुझाव भी दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी बढ़ाता रहा है। कार्नी का संदेश भी अब स्पष्ट है-कनाडा पुराने रिश्तों की स्थिति में लौटने की उम्मीद नहीं कर रहा।
फिलहाल आगे की बातचीत की कोई नई तारीख तय नहीं हुई है। कनाडा जवाबी टैरिफ की तैयारी कर रहा है, जबकि अमेरिका अपने कदम को कनाडाई जवाबी कार्रवाई का उत्तर बता रहा है। अगर दोनों देशों ने जल्द समझौता नहीं किया, तो इसका असर सिर्फ 20 अरब डॉलर के सामान तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तरी अमेरिका की गहरी सप्लाई चेन, USMCA और दशकों पुराने अमेरिका-कनाडा संबंधों पर भी इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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