US Defence Strategy 2026: चीन पर 'ताकत से लगाम', लेकिन भारत का नाम गायब क्यों?

Published : Jan 25, 2026, 12:18 AM IST

America NDS 2026: अमेरिका की नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी (NDS 2026) ने दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स में हलचल मचा दी है। शनिवार को जारी इस 24 पेज की स्ट्रैटजी में इंडो-पैसिफिक में चीन पर 'ताकत से लगाम' लगाना है, लेकिन भारत का नाम गायब है। 

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चीन पर फोकस, लेकिन टोन बदली हुई

NDS 2026 में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है कि भारत का नाम तक नहीं लिया गया। वही भारत, जिसे अब तक वॉशिंगटन चीन के खिलाफ अपने सबसे अहम पार्टनर के तौर पर देखता रहा है। इसमें अमेरिका ने माना है कि चीन और उसकी सेना (PLA) इंडो-पैसिफिक में पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हो चुकी है। यह इलाका दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला मार्केट है, जिसका असर सीधे अमेरिकी सिक्योरिटी, फ्रीडम और इकोनॉमी पर पड़ता है।

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इंडो-पैसिफिक में अमेरिका किस पर भरोसा कर रहा है?

इस नई नीति में अमेरिका ने अपने औपचारिक सहयोगियों पर ज्यादा ज़िम्मेदारी डालने की बात कही है। खासतौर पर जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे देशों पर ज्यादा फोकस है। NDS के मुताबिक, चीन को संतुलित करने में इन देशों की भूमिका निर्णायक होगी। हैरानी की बात यह है कि क्वॉड (Quad) का अहम सदस्य होने के बावजूद भारत का जिक्र नहीं है।

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ट्रंप का चीन को लेकर नया फार्मूला

डिफेंस स्ट्रैटेजी में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सीधे संवाद के लिए तैयार हैं, जिसका लक्ष्य स्थिर शांति, फेयर ट्रेड और सम्मानजनक रिश्ते है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया गया है कि बातचीत ताकत की पोजिशन से होगी, न कि कमजोरी से। अमेरिका ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ मिलिट्री टू मिलिट्री कम्युनिकेशन, तनाव कम करना और रणनीतिक स्थिरता पर जोर देने की बात कही है। लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि चीन का तेज, बड़ा और हाई-क्वालिटी मिलिट्री बिल्ड-अप अमेरिका की नजर में पूरी तरह है।

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फर्स्ट आइसलैंड चेन चीन के लिए रेड लाइन?

NDS 2026 में एक अहम रणनीतिक ऐलान किया गया है, फर्स्ट आइसलैंड चेन (FIC) पर मजबूत डिफेंस वॉल, जो जापान, ताइवान और फिलीपींस तक फैली है। अमेरिका यहां ऐसा डिफेंस सिस्टम बनाना चाहता है, जिससे किसी भी देश को आक्रामक कदम उठाने से पहले सौ बार सोचना पड़े और चीन को क्षेत्रीय दबदबा बनाने से रोका जा सके।

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भारत-अमेरिका रिश्ते क्यों ठंडे हैं?

इस पूरी रणनीति के बैकग्राउंड में भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी प्रमुख वजहें अगस्त में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ, रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका का दबाव, रक्षा और व्यापार में रूस से दूरी बनाने की मांग और H-1B जैसे वीज़ा नियमों में सख्ती है। इन्हीं वजहों से पिछले साल क्वॉड लीडर्स समिट भी नहीं हो पाया। दिसंबर में जारी नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी (NSS) में अमेरिका ने माना था कि भारत के साथ कॉमर्शियल रिलेशन बेहतर करना जरूरी है, ताकि भारत इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी में बड़ी भूमिका निभा सके। NSS में चीन का नाम लिए बिना कहा गया था कि किसी एक देश को क्षेत्रीय दबदबा नहीं बनाने दिया जाएगा।

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