
वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। दशकों पुरानी दुश्मनी और युद्ध के मुहाने पर खड़े अमेरिका और ईरान ने एक बेहद गुप्त और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)' पर इलेक्ट्रॉनिकली (डिजिटल) दस्तखत कर दिए हैं। इस अप्रत्याशित समझौते के साथ ही दोनों देशों के बीच चल रही जंग तुरंत खत्म हो गई है और दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री जीवनरेखा यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को हमेशा के लिए खोल दिया गया है।
इस महाडील को लेकर सस्पेंस का स्तर यह था कि शुरुआत में इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आमने-सामने साइन होने की उम्मीद थी। लेकिन डिप्लोमैटिक सूत्रों के मुताबिक, परदे के पीछे अचानक टाइमटेबल को बदलने की रणनीति बनी। बातचीत से वाकिफ एक सोर्स ने खुलासा किया कि शुक्रवार का इंतजार किए बिना होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत चालू करने के मकसद से इस एग्रीमेंट को प्रीपोन (पहले) किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस में एक डिनर के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस पर साइन किए, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी डिजिटल माध्यम से तुरंत इस पर अपनी मुहर लगा दी।
इस बेहद पेचीदा और मुश्किल बातचीत को अंजाम तक पहुंचाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मुख्य मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका निभाई है। डील की पुष्टि करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने गर्व से एलान किया: "ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग' पर दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इलेक्ट्रॉनिकली साइन कर दिए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने इसे मंज़ूरी दी है। यह समझौता तुरंत प्रभावी होगा, जिसके तहत ईरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।" इस खुलासे ने साफ कर दिया कि पर्दे के पीछे इस समझौते की स्क्रिप्ट काफी समय से लिखी जा रही थी।
🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF
— The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026
व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए 14-सूत्रीय मेमोरेंडम के मुताबिक, यह सिर्फ एक सीजफायर नहीं बल्कि ईरान के कायाकल्प का रास्ता है। इस समझौते के तहत ईरान अपनी परमाणु सामग्रियों को नष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है। इसके बदले में अमेरिका ने ईरान पर लगी सख्त आर्थिक पाबंदियों में ढील देने का वादा किया है। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अगर ईरानियों का व्यवहार बेहतर रहता है, तो अमेरिका उन्हें आर्थिक और प्रतिबंधों से ऐसी बड़ी राहत देगा जिससे ईरान एक अधिक समृद्ध देश बन सकेगा। इसके अलावा, अंतिम बातचीत जारी रहने तक ईरानी तेल के एक्सपोर्ट को भी मंजूरी दे दी गई है।
इस समझौते के बीच सबसे बड़ा ट्विस्ट ईरान के तेल रेवेन्यू और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने तेल रेवेन्यू तक बिना किसी रोक-टोक के एक्सेस चाहता है ताकि वह अपनी पंगु हो चुकी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा कर सके। इसके अलावा, इस समझौते का सबसे बड़ा असर लेबनान पर पड़ेगा। मेमोरेंडम में लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने और हिज़्बुल्लाह समेत सभी मोर्चों पर मिलिट्री ऑपरेशंस को तुरंत रोकने का वादा किया गया है। यही नहीं, फाइनल एग्रीमेंट होने के महज 30 दिनों के भीतर मिडिल ईस्ट के इस पूरे इलाके से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी हो जाएगी, जो अमेरिकी विदेश नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है।
भले ही इस मेमोरेंडम पर डिजिटल साइन हो चुके हैं और यह तुरंत लागू हो गया है, लेकिन असली सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के हाई-लेवल डेलीगेशन के बीच एक बेहद अहम मीटिंग होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिकी टीम को वाइस-प्रेसिडेंट जेडी वेंस लीड करेंगे, जबकि ईरान की तरफ से वहां के पार्लियामेंट्री स्पीकर मोहम्मद-बाघेर ग़ालिबफ़ कमान संभालेंगे। इस मीटिंग का मुख्य फोकस ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर आगे की व्यापक बातचीत शुरू करना और आने वाले हफ्तों में एक फाइनल, स्थाई समझौते का ब्लूप्रिंट तैयार करना है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कागजी शांति जमीनी हकीकत बन पाएगी?
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