UP Budget 2026: योगी सरकार की कृषि योजनाओं से वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर में बढ़ी किसानों की आय

Published : Feb 18, 2026, 10:34 PM IST
Yogi Adityanath government UP Budget 2026 agricultural schemes

सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि बजट 2026-27 में 20% बढ़ोतरी कर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया है। वाराणसी में सोलर पंप, कानपुर में खेत तालाब योजना और गोरखपुर में 90% अनुदान पर स्वीट कॉर्न खेती से किसानों को लाखों की कमाई हो रही है।

गोरखपुर/वाराणसी/कानपुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों को सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक तरक्की का भागीदार बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार ने ‘कम लागत–अधिक उत्पादन’ की नीति को खेती की मुख्य आधारशिला बनाया है। इसमें नई तकनीक, आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं की अहम भूमिका है।

राज्य सरकार के बजट प्रावधानों और विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, सिंचाई और भंडारण जैसी सुविधाओं में भी सुधार हो रहा है। योगी सरकार के पहले कार्यकाल से ही कृषि क्षेत्र का विकास और किसानों की आय बढ़ाना प्राथमिकता में शामिल रहा है। हर साल बजट में कृषि के लिए राशि बढ़ाकर सरकार अपनी प्रतिबद्धता भी दिखा रही है।

वाराणसी कृषि विकास: बजट 2026-27 में 20% वृद्धि, सोलर पंप से सिंचाई आसान

पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 2026-27 के बजट में कृषि योजनाओं के लिए लगभग 20 प्रतिशत अधिक प्रावधान किया गया है। कुल ₹10,888 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है। वाराणसी जिले में 94,188 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है और यहां 3,05,823 किसान खेती से जुड़े हैं। वर्ष 2025-26 में 558.067 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न और 29.354 हजार मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

काशी की पहचान ही अन्न उत्पादन से जुड़ी है। यहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को सोलर पंप योजना के तहत सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंप दिए जा रहे हैं। इससे बिजली की समस्या कम हुई है और लागत में भी कमी आई है। ग्राम्य विकास के लिए 25,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। किसान सतीश सिंह और अजीत कुमार बताते हैं कि सोलर पंप से सिंचाई सस्ती और समय पर होने लगी है, जिससे उत्पादन बढ़ा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की भरपाई भी हो रही है। किसान पाठशाला, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, अनुदान पर बीज और कृषि यंत्र जैसी योजनाओं से किसानों को राहत मिल रही है।

कानपुर खेत तालाब योजना: मछली पालन से लाखों की कमाई

कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक के कोरियां गांव के किसान देवेंद्र वर्मा ‘खेत तालाब योजना’ का सफल उदाहरण हैं। उन्होंने अपनी जमीन के एक हिस्से में तालाब बनवाया और मछली पालन शुरू किया। देवेंद्र ने वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य बीज डाले और पानी की गुणवत्ता व चारे का सही प्रबंधन किया। तालाब के किनारों पर अन्य फसलें भी उगाईं। आज वे एक सीजन में 8 से 9 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। यह आय पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और सरसों की तुलना में कई गुना अधिक है।

देवेंद्र वर्मा का कहना है कि शुरुआत में जोखिम लगा, लेकिन सरकारी योजनाओं और अधिकारियों के मार्गदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा। सही प्रबंधन और आधुनिक तकनीक अपनाकर मछली पालन से अच्छी आमदनी संभव है। वे अन्य किसानों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने की सलाह देते हैं।

गोरखपुर स्वीट कॉर्न खेती: 90% अनुदान से दोगुनी आय

गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान मिला। कृषक उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़े किसानों ने आठ एकड़ में स्वीट कॉर्न की खेती की। स्वीट कॉर्न का बीज बाजार में लगभग 3,200 रुपये प्रति किलो मिलता है, लेकिन सरकारी सब्सिडी के कारण किसानों को यह केवल 10 प्रतिशत कीमत पर मिला। इससे लागत घटकर प्रति एकड़ 8 से 10 हजार रुपये रह गई।

करीब ढाई महीने में फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ औसतन 40 क्विंटल उत्पादन मिला। स्थानीय बाजार में 30 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री हुई। किसानों ने प्रति एकड़ 1 से 1.25 लाख रुपये तक की आय अर्जित की। एफपीओ के संचालक आकिब जावेद के अनुसार, सरकार की मदद से किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हो रही है। इस बार बजट में एफपीओ के लिए 75 करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था की गई है, जिससे कृषि नवाचार को और बढ़ावा मिलेगा।

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