Vedanta Power Plant Blast: शुरुआती जांच में खुल रहीं चौंकाने वाली लापरवाही की परतें

Published : Apr 17, 2026, 11:01 AM IST

छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट धमाके की शुरुआती जांच में चौंकाने वाल मामले सामने आए हैं। बॉयलर में ज़्यादा ईंधन, दबाव बढ़ने और रखरखाव में लापरवाही को मुख्य कारण बताया गया है। हादसे में 20 मौतें हुईं। FIR दर्ज कर जांच SIT को सौंपी गई।

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Vedanta Power Plant Blast: छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के सिंहितराई गांव में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ भीषण धमाका अब धीरे-धीरे अपने कारणों के साथ सामने आ रहा है। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में बॉयलर से टरबाइन तक जाने वाली हाई-प्रेशर स्टीम पाइप फटने से 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआती जांच के मुताबिक, यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं बल्कि गंभीर परिचालन लापरवाही का परिणाम था।

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तकनीकी जांच का खुलासा: बॉयलर में बढ़ा दबाव बना विनाश की वजह

चीफ बॉयलर इंस्पेक्टर और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया है कि बॉयलर की भट्टी में जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा हो गया था। इससे अंदर अत्यधिक दबाव (overpressure) उत्पन्न हुआ, जिसने पूरी प्रणाली को अस्थिर कर दिया। दबाव इतना बढ़ गया कि बॉयलर का निचला पाइप अपनी जगह से खिसक गया और विस्फोट हो गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, यही तकनीकी विफलता हादसे का मुख्य कारण बनी।

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लापरवाही की परतें: रखरखाव में चूक या सिस्टम फेलियर?

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट संकेत मिला है कि प्लांट में नियमित रखरखाव और संचालन मानकों का पालन ठीक से नहीं किया गया। आरोप है कि वेदांता समूह और उसके ठेकेदार NGSL (NTPC GE Power Services Limited) द्वारा मशीनरी की निगरानी और सुरक्षा प्रक्रियाओं में गंभीर चूक की गई। जांच में कहा गया है कि इसी लापरवाही ने दबाव नियंत्रण प्रणाली को प्रभावित किया, जिसके चलते बॉयलर में अचानक असामान्य उतार-चढ़ाव हुआ।

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FIR दर्ज: कौन-कौन जांच के दायरे में?

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106, 289 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की है। FIR में लगभग 8 से 10 लोगों के नाम शामिल हैं, जिनमें वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटेल का नाम भी सामने आया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच आगे बढ़ने पर और नाम भी जोड़े जा सकते हैं।

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स्पेशल टीम गठित: अब हर एंगल से होगी जांच

हादसे की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT-स्टाइल यूनिट) का गठन किया गया है। इस टीम की अगुवाई एडिशनल SP पंकज पटेल कर रहे हैं, जिसमें पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और सब-डिविजनल अधिकारी शामिल हैं। टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह केवल तकनीकी विफलता थी या इसके पीछे प्रबंधन स्तर पर सिस्टमेटिक लापरवाही भी जिम्मेदार है।

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क्या यह सिर्फ हादसा था या सिस्टम की विफलता?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना न रहकर कॉरपोरेट सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। फिलहाल सभी निगाहें SIT की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह त्रासदी तकनीकी गलती थी या प्रबंधन की गंभीर चूक का नतीजा।

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