Washington Post Layoffs: कौन हैं ईशान थरूर, जिनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया?

Published : Feb 05, 2026, 09:45 AM IST

Global Media Shock: अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार Washington Post में अचानक मची उथल-पुथल! कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और चर्चित अंतरराष्ट्रीय पत्रकार ईशान थरूर को नौकरी से निकाल दिया गया। क्या यह सिर्फ छंटनी है या ग्लोबल पत्रकारिता के अंत की आहट? 

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Washington Post Layoffs: अमेरिका के मशहूर अखबार वॉशिंगटन पोस्ट (Washington Post) से आई एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर ने पूरी मीडिया इंडस्ट्री को हिला दिया है। अखबार ने अपने लगभग एक-तिहाई स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट में हुई ऐतिहासिक छंटनी, जिसमें शशि थरूर के बेटे और जाने-माने पत्रकार ईशान थरूर को भी नौकरी से निकाल दिया गया। इस कदम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ग्लोबल पत्रकारिता अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है?  

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कौन हैं ईशान थरूर, जिनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया?

ईशान थरूर एक सीनियर इंटरनेशनल अफेयर्स कॉलमनिस्ट हैं। वे भारतीय कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के बेटे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान पिता के नाम से नहीं, बल्कि अपनी रिपोर्टिंग से बनाई। उन्होंने 2017 में शुरू हुए WorldView कॉलम की पहचान माने जाते थे। उनकी रिपोर्टिंग को करीब 5 लाख सब्सक्राइबर पढ़ते थे। 

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ईशान थरूर को क्यों निकाला गया?

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जा रहा है। उत्तर साफ है: ईशान थरूर को किसी व्यक्तिगत गलती, विवाद या रिपोर्टिंग की कमी के कारण नहीं निकाला गया। उन्हें निकाला गया क्योंकि वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग को बड़े पैमाने पर सीमित करने का फैसला किया। ईशान ने खुद X (पूर्व Twitter) पर लिखा: “आज मुझे और मेरे ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को वॉशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया।” उन्होंने एक खाली न्यूज़रूम की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा-“A bad day.”

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आखिर वॉशिंगटन पोस्ट ने इतनी बड़ी छंटनी क्यों की?

बुधवार को वॉशिंगटन पोस्ट ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि यह फैसला बड़े पुनर्गठन (Restructuring) का हिस्सा है। इसके तहत स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया। किताबों की कवरेज खत्म कर दी गई। कई विदेशी ब्यूरो बंद कर दिए गए। अखबार प्रबंधन का कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल मीडिया की बढ़ती ताकत और दर्शकों की आदतों में बदलाव के कारण यह फैसला लेना पड़ा।

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मिडिल ईस्ट और यूक्रेन कवरेज बंद होने का क्या मतलब है?

इस छंटनी में पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम को हटा दिया गया। काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर ने कहा कि यह फैसला “समझ से बाहर” है। वहीं, यूक्रेन युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार लिज़ी जॉनसन भी इस छंटनी की शिकार हुईं। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या अब बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्टिंग खत्म होती जा रही है?

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क्या वॉशिंगटन पोस्ट खुद अपनी विरासत को नुकसान पहुंचा रहा है?

अखबार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस फैसले को “Self-Inflicted Brand Destruction” यानी खुद से किया गया नुकसान बताया। पत्रकारिता जगत के कई जानकारों का मानना है कि करीब 150 साल पुरानी इस संस्था की पहचान को यह फैसला लंबे समय तक नुकसान पहुँचा सकता है। The Atlantic में छपे एक लेख में चेतावनी दी गई कि यह रास्ता अमेरिकी लोकतंत्र के लिए भी खतरा बन सकता है।

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क्या यह सिर्फ वॉशिंगटन पोस्ट की कहानी है?

नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला Global Journalism Crisis का संकेत है। डिजिटल युग, सोशल मीडिया और घटती रेवेन्यू ने दुनिया भर के न्यूज़रूम को संकट में डाल दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट की यह छंटनी सिर्फ एक अखबार की खबर नहीं है। यह संकेत है कि ग्लोबल जर्नलिज्म संकट में है। डिजिटल युग में बड़े न्यूज़रूम सिकुड़ रहे हैं और सच तक पहुंचने की राह और कठिन हो रही है।

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