मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों को गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला हुआ। साथ ही उज्जैन में 945 करोड़ रुपये का एलिवेटेड कॉरिडोर, रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना और कई सड़क विकास योजनाओं को मंजूरी दी गई।
मध्यप्रदेश में CM Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी।
निर्णय के अनुसार, खरीदे गए गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जाने वाली अधिशेष (सरप्लस) मात्रा का निस्तारण Madhya Pradesh State Civil Supplies Corporation द्वारा खुली निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रक्रिया में होने वाले खर्च का वहन राज्य सरकार करेगी।
किसानों को मिलने वाली बोनस राशि का भुगतान विभागीय बजट प्रावधान के माध्यम से किया जाएगा, जबकि सरप्लस गेहूं के निस्तारण से जुड़े खर्च की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के बजट से की जाएगी।
लोक निर्माण विभाग के विकास कार्यों के लिए 4,525 करोड़ रुपये की स्वीकृति
कैबिनेट बैठक में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत प्रदेश में सड़क, भवन और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्यों तथा रखरखाव के लिए 4 हजार 525 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। इस राशि से राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क निर्माण, पुल निर्माण, भवनों के रखरखाव और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
उज्जैन में 945 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा
कैबिनेट ने Ujjain शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) चौराहा से इंदौर गेट तक 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर और निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लंबाई 5.32 किलोमीटर होगी और इसके निर्माण के लिए 945 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम और अन्य योजनाओं को भी मंजूरी
कैबिनेट ने राज्य की सड़क विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए भी कई महत्वपूर्ण स्वीकृतियां दी हैं।
- मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 तक जारी रखने के लिए 7 करोड़ 38 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।
- जनभागीदारी अंतर्गत विकास हेतु अनुदान योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की अनुमति दी गई।
- एनडीबी (NDB) से वित्त पोषित पुल और सड़क निर्माण योजना की निरंतरता के लिए 50 करोड़ 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।
- मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-6 को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 1,543 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
- मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-7 के लिए इसी अवधि में 1,476 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
शासकीय भवनों और विश्राम गृहों के रखरखाव के लिए बजट स्वीकृत
कैबिनेट ने शासकीय आवास, विश्राम गृहों और कार्यालय भवनों के रखरखाव के लिए भी बजट स्वीकृत किया है।
- शासकीय आवास और विश्राम गृहों के रखरखाव के लिए 200 करोड़ 35 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।
- कार्यालय भवनों के रखरखाव, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण तथा शौर्य स्मारक के संचालन और संधारण के लिए 300 करोड़ 70 लाख रुपये मंजूर किए गए।
रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को मंजूरी
कैबिनेट ने Rewa जिले में पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 228 करोड़ 42 लाख रुपये होगी और इसके माध्यम से 7,350 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जवा और त्योंथर तहसील के 37 गांवों के किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इस संशोधन के तहत मध्यप्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम को एमएसएमई विभाग से हटाकर वित्त विभाग के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार इस बदलाव से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गौपालन एवं पशुपालन विभाग
कैबिनेट ने प्रशासनिक बदलाव करते हुए पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम बदलकर गौपालन एवं पशुपालन विभाग करने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी का नाम भी बदलकर संचालनालय गौपालन एवं पशुपालन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे गौसंवर्धन और पशुपालन गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता दी जा सकेगी।


